नीति में एकल प्रमाणन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए योग सर्टिफिकेशन बोर्ड के प्रमाणनों को प्राथमिकता देने का प्रविधान किया गया है। इसके अंतर्गत बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में सफल होने वाले योग अनुदेशकों को परीक्षक शुल्क की प्रतिपूर्ति दी जाएगी। हर साल 500 ऐसे अनुदेशकों को इसका लाभ मिलेगा, जो योग प्रोटोकाल इंस्ट्रक्टर से लेकर योग थेरेपिस्ट के विभिन्न स्तरों के प्रमाणन पाठ्यक्रमों में उत्तीर्ण होंगे।

योग संस्थानों का होगा शत-प्रतिशत पंजीकरण

नीति में योग संस्थानों का शत-प्रतिशत पंजीकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें एक विशेष आनलाइन योग प्लेटफार्म स्थापित करने और योग को बढ़ावा देने के लिए प्रचार अभियान व अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलनों का आयोजन करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही मार्च 2028 तक 15 से 20 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भागीदारी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

योग निदेशालय की स्थापना

नीति के अंतर्गत सरकार योग और प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना करेगी। यह निदेशालय इस नीति के संचालन, नियमन, अनुदान वितरण और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी करेगा। निदेशालय में एक निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक, योग विशेषज्ञ, रजिस्ट्रार व अन्य स्टाफ शामिल होंगे।

नीति के क्रियान्वयन में खर्च होंगे 35 करोड़

नीति के क्रियान्वयन में सरकार अगले पांच वर्ष में 35 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसमें योग केंद्र के अनुदान में 35 करोड़, अनुसंधान में एक करोड़, शिक्षक प्रमाणन में 1.81 करोड़ और मौजूदा संस्थानों में योग केंद्र की स्थापना को 7.5 करोड़ का व्यय होगा।