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केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसे की ममता पर दूसरी मार: बेटे की मौत के सदमे में मां का निधन, दो सप्ताह में टूटा परिवार

दिनांक: 29 जून 2025 | स्थान: मेरठ, उत्तर प्रदे

मेरठ (उत्तर प्रदेश)। केदारनाथ में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश हादसे में शहीद हुए पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) राजवीर सिंह चौहान के परिवार पर एक और दुखद वज्रपात हुआ है। हादसे के महज 13 दिन बाद रविवार, 29 जून को उनकी मां विजयलक्ष्मी चौहान (58) का भी दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। परिजनों का कहना है कि बेटे की असमय मौत के सदमे ने विजयलक्ष्मी को पूरी तरह तोड़ दिया था।


शनिवार सुबह बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में हुई मौत

परिवार के अनुसार, शनिवार सुबह 28 जून को विजयलक्ष्मी ने अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत की। आनन-फानन में उन्हें मेरठ के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद रविवार को उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक घाट पर किया गया।

बड़े बेटे चंद्रवीर सिंह चौहान ने बताया कि मां राजवीर की मौत के बाद से गहरे मानसिक तनाव में थीं और दिन-रात रोती रहती थीं। परिवार लगातार उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह खुद को संभाल नहीं सकीं।


15 जून को हुआ था हेलिकॉप्टर हादसा

उल्लेखनीय है कि 15 जून 2025 को आर्यन हेली एविएशन का एक हेलिकॉप्टर केदारनाथ से गुप्तकाशी लौटते समय गौरी माई खर्क के पास क्रैश हो गया था। इस भीषण हादसे में पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि.) राजवीर सिंह चौहान समेत सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसा इतना गंभीर था कि शवों की पहचान अंगूठी, चेन और कंगन के जरिए करनी पड़ी थी।


सम्मान समारोह अब शोक सभा में बदला

रविवार, 29 जून को सर्व समाज की ओर से ‘मां भारती के वीर सपूत’ कार्यक्रम का आयोजन होना था, जिसमें नंदी बाबा मंदिर चौक और एक प्रमुख सड़क का नाम राजवीर सिंह चौहान के नाम पर रखे जाने की घोषणा होनी थी। साथ ही सामूहिक तिरंगा यात्रा, हनुमान चालीसा पाठ और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन प्रस्तावित था।

लेकिन विजयलक्ष्मी के निधन के बाद यह पूरा कार्यक्रम शोक सभा में बदल गया। भारी संख्या में क्षेत्रवासियों ने इस दुखद घड़ी में चौहान परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।


परिवार में दो हफ्तों में दूसरी मौत, गांव में मातम

राजवीर की असमय मृत्यु के बाद अब विजयलक्ष्मी की मौत से परिवार पूरी तरह टूट चुका है। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सैन्य अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने चौहान परिवार को हरसंभव सहयोग देने की बात कही है।


एक वीर सपूत और उसकी मां की एक के बाद एक विदाई ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। यह सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरे समाज का शोक है।

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