श्यामपुर घाट, हरिद्वार | 30 जून 2025
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और इसके चलते बन रहे बाढ़ व भूस्खलन जैसे हालातों को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है। इसी क्रम में सोमवार को हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंहनगर, चंपावत और नैनीताल जिलों के मैदानी इलाकों में बाढ़ आपदा से निपटने की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य था—वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना।
हरिद्वार में गंगा नदी में बहते युवक का लाइव रेस्क्यू
हरिद्वार के श्यामपुर गंगा घाट पर आयोजित मॉक ड्रिल में एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें एक युवक को गंगा की तेज धारा में बहता हुआ दर्शाया गया।
- सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन टीम, जल पुलिस, एसडीआरएफ और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत मोर्चा संभाला।
- कुछ ही मिनटों में युवक को रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया और प्राथमिक उपचार दिया गया।
- इस दौरान लोगों की भीड़ ने राहत कार्य की तत्परता को देखा और सराहना की।
यह मॉक ड्रिल केवल एक दिखावा नहीं था, बल्कि यह प्रशासन की आपदा पूर्व तैयारी और समन्वय तंत्र की हकीकत को परखने का एक प्रभावी जरिया साबित हुआ।
भीमगोडा बैराज से पानी छोड़े जाने की मात्रा सीमित
लगातार बारिश और पहाड़ों से आ रही सिल्ट (गाद) की भारी मात्रा को देखते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने भीमगोडा बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कटौती कर दी है।
- हर की पैड़ी समेत अन्य घाटों पर केवल उतना ही पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे श्रद्धालु स्नान और आचमन कर सकें।
- गंगा का जलस्तर 293 मीटर तक पहुंच चुका है, जो खतरे के निशान के बेहद करीब है।
प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे गंगा की तेज धाराओं में ना उतरें। इसके बावजूद कुछ लोग सोशल मीडिया के लिए नदी के बीच में जाकर वीडियो बना रहे हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
राज्यभर में 179 सड़कें मलबे के कारण बंद
राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन और मलबा आने की वजह से 179 मार्गों पर आवाजाही ठप हो गई है।
- कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है।
- लोक निर्माण विभाग (PWD) और आपदा प्रबंधन की टीमें जेसीबी और अन्य उपकरणों से मार्ग बहाल करने में जुटी हुई हैं।
पांच जिलों में मॉक ड्रिल की प्रमुख झलकियां
| जिला | स्थान | ड्रिल गतिविधि |
|---|---|---|
| हरिद्वार | श्यामपुर घाट, विष्णुघाट | नदी में बहाव से रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार |
| देहरादून | रिस्पना नदी तट | फ्लड अलर्ट प्रणाली का परीक्षण |
| ऊधमसिंहनगर | किच्छा व रुद्रपुर | जलभराव वाले क्षेत्रों में बचाव |
| चंपावत | टनकपुर घाटी | राहत शिविर तैयारियां |
| नैनीताल | हल्द्वानी क्षेत्र | जल निकासी व यातायात नियंत्रण अभ्यास |
प्रशासन की अपील
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने कहा है कि आमजन बाढ़ जैसे हालातों को हल्के में न लें और अफवाहों पर ध्यान न दें। हर जिले में कंट्रोल रूम सक्रिय है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क करने की अपील की गई है।
निष्कर्ष:
यह मॉक ड्रिल केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य प्रशासन की उस ज़िम्मेदारी का हिस्सा है जो मानसून की हर चुनौती से लड़ने को तैयार है। उत्तराखंड सरकार की कोशिश है कि हर नागरिक सुरक्षित रहे, और किसी भी आपदा की स्थिति में जान-माल का नुकसान न्यूनतम हो।


