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उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025: उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा बनेंगे ओबीसी प्रधान, जनगणना 2011 के आधार पर तय हुआ आरक्षण

देहरादून | 30 जून 2025

उत्तराखंड में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण की सूची जारी कर दी गई है। इस बार उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर जिले ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षित प्रधान पदों की संख्या में सबसे आगे हैं। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर यह आरक्षण तय किया गया है। जिन क्षेत्रों में ओबीसी की आबादी अधिक है, वहां उन्हें ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला है।


पंचायत चुनाव 2025: आरक्षण का नया समीकरण

एकल सदस्यीय समर्पित आयोग द्वारा पंचायत चुनावों में आरक्षण की अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य पदों के आरक्षण तय किए गए हैं।
ओबीसी वर्ग के लिए कुल 457 प्रधान पद आरक्षित किए गए हैं।


जिलावार प्रधान पदों पर ओबीसी आरक्षण स्थिति

जिलाकुल प्रधान पदओबीसी के लिए आरक्षित
उत्तरकाशी52195
ऊधमसिंह नगर37371
टिहरी104969
पिथौरागढ़68141
अल्मोड़ा116039
देहरादून40934
नैनीताल47520
बागेश्वर40520
चमोली61518
चंपावत31216
पौड़ी116625
रुद्रप्रयाग33311

उत्तरकाशी (95 सीटें) और यूएस नगर (71 सीटें) ओबीसी प्रधानों के लिहाज से शीर्ष दो जिले हैं।
पौड़ी जैसे बड़े जिले में कुल 1166 पदों में सिर्फ 25 ओबीसी के लिए आरक्षित हैं, जो जनसंख्या अनुपात के अंतर को दर्शाता है।


कुल आरक्षित और अनारक्षित प्रधान पद

राज्य भर में 7499 ग्राम पंचायतों के प्रधान चुने जाने हैं। इनमें:

  • सामान्य वर्ग: 2747 पद
  • ओबीसी: 457 पद
  • एससी: 1380 पद
  • एसटी: 225 पद
  • महिला व अन्य: 2690 पद

कुल आरक्षित पद: 4752
कुल अनारक्षित पद: 2747


क्यों बढ़े उत्तरकाशी और यूएस नगर में ओबीसी पद?

आरक्षण आयोग के अनुसार, जहां ओबीसी जनसंख्या ज्यादा है, वहां प्रतिनिधित्व भी अधिक तय किया गया है।

  • ऊधमसिंह नगर के मैदानी इलाकों में खासकर तराई क्षेत्र में ओबीसी समुदाय की संख्या अन्य जिलों की तुलना में अधिक है।
  • उत्तरकाशी, जो आमतौर पर जनसंख्या में पीछे रहता है, वहां भी विशिष्ट ग्रामीण क्षेत्रों में ओबीसी वर्ग की बहुलता के चलते अधिक आरक्षण मिला।

राजनीतिक दृष्टिकोण से क्यों है ये अहम?

उत्तराखंड में ओबीसी समुदाय का ग्रामीण राजनीति में प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

  • यह आरक्षण न सिर्फ राजनीतिक भागीदारी को सशक्त करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में ग्राम स्तर पर जातीय समीकरण भी बदल सकता है।
  • इससे राजनीतिक दलों को भी उम्मीदवार चयन में रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

निष्कर्ष

2025 के पंचायत चुनावों में आरक्षण सूची ने न केवल सामाजिक प्रतिनिधित्व का नया संतुलन पेश किया है, बल्कि आने वाली राजनीति की तस्वीर भी बदलने के संकेत दिए हैं।
उत्तरकाशी और ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में अब ओबीसी नेतृत्व की नई पीढ़ी सामने आने को तैयार है।

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