Uttarakhand Education Alert | 1 जुलाई से खुले स्कूल, लेकिन जर्जर भवनों ने बढ़ाई चिंता
स्थान: देहरादून | 1 जुलाई 2025
स्कूल खुले, पर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल — कई जगहों पर छतें टपक रहीं, भूस्खलन का बना खतरा
गर्मियों की छुट्टियों के बाद उत्तराखंड में आज से सभी सरकारी स्कूल फिर से खुल गए हैं। लेकिन इन स्कूलों में पढ़ाई शुरू होते ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पूरे प्रदेश में 942 स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं, जिनमें पढ़ाई के दौरान छत टपकने, दीवार गिरने और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
खस्ताहाल भवन, टपकती छतें, टूटी सुरक्षा दीवारें
बारिश के मौसम में जर्जर भवनों की हालत और खतरनाक हो गई है:
- कुछ स्कूलों की छतें टपक रही हैं, जिससे बच्चों को बारिश के बीच क्लास में बैठना मुश्किल हो गया है
- कई भवनों की छतों पर पानी जमा हो रहा है, जिससे गिरने का खतरा है
- सुरक्षा दीवारें न होने के कारण पर्वतीय जिलों में भूस्खलन का डर भी बना हुआ है
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा कि हर साल बरसात में जानमाल का खतरा बना रहता है, लेकिन प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान अब तक नहीं किया गया।
जिलावार स्थिति: कहां कितने स्कूल खतरे में
| जिला | जर्जर स्कूल |
|---|---|
| पिथौरागढ़ | 163 |
| अल्मोड़ा | 135 |
| टिहरी | 133 |
| नैनीताल | 125 |
| पौड़ी | 107 |
| देहरादून | 84 |
| ऊधमसिंह नगर | 55 |
| हरिद्वार | 35 |
| रुद्रप्रयाग | 34 |
| चमोली | 18 |
| चंपावत | 16 |
| उत्तरकाशी | 12 |
| बागेश्वर | 6 |
कुल: 942 स्कूल भवन जर्जर हालत में
शिक्षकों की मांग: जुलाई में हो छुट्टी, बरसात में पढ़ाई न हो बाधित
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र रावत ने सुझाव दिया कि:
“जून की छुट्टियां जुलाई में शिफ्ट की जाएं, ताकि बरसात के समय बच्चों और शिक्षकों को जोखिम न उठाना पड़े।”
वहीं, मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
शासन का जवाब: बच्चों को जर्जर भवनों में न बैठाएं
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती का दावा है कि:
- माध्यमिक स्तर पर सिर्फ 19 विद्यालय भवन जर्जर थे
- इनमें से कुछ को ध्वस्त कर नए भवनों का निर्माण किया गया है
- सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि “किसी भी जर्जर भवन में छात्रों को न बैठाया जाए”
शिक्षा महानिदेशक का निर्देश: बच्चों की सुरक्षा हो सर्वोपरि
शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को चेताया है:
- छात्रों को जीर्ण-शीर्ण कमरों या दीवारों के पास न बैठाया जाए
- बरसात के दौरान स्कूल के पास बहते नालों से सावधानी बरती जाए
- स्कूल परिसरों में जलभराव न होने दिया जाए
- सभी स्कूलों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए
निष्कर्ष:
छुट्टियों के बाद जहां बच्चों को स्कूल लौटने की खुशी होनी चाहिए थी, वहां अब डर और खतरा उनके साथ लौट आया है। राज्य सरकार को इन 942 जर्जर स्कूलों के नवीनीकरण और सुरक्षा के लिए त्वरित कदम उठाने होंगे, वरना कोई भी हादसा बच्चों के भविष्य को दागदार बना सकता है।


