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ऋषिकेश में स्क्रीनिंग प्लांट के अंदर संदिग्ध हालात में नाबालिग का शव मिला, गुस्साए लोगों ने किया प्रदर्शन और जाम

ऋषिकेश | तिथि – 6 जुलाई 2025

ऋषिकेश के कुड़कावाला क्षेत्र में शनिवार को एक नाबालिग किशोरी का शव सुसवा नदी किनारे स्थित एक स्क्रीनिंग प्लांट के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से हड़कंप मच गया। मृतका कूड़ा बीनने गई थी, लेकिन कुछ ही देर में वह संदिग्ध हालात में मृत मिली। इस घटना से स्थानीय लोगों और विभिन्न हिंदू संगठनों में उबाल आ गया। उन्होंने पहले कोतवाली का घेराव किया और फिर डोईवाला चौक पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया।


घटना का पूरा ब्यौरा

शनिवार सुबह करीब 11 बजे एक बस्ती की 4-5 किशोरियां कूड़ा बीनने के लिए सुसवा नदी किनारे स्थित स्क्रीनिंग प्लांट गई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्लांट में मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें डराया-धमकाया, जिससे बाकी लड़कियां भाग गईं। लेकिन एक किशोरी को कर्मचारियों ने पकड़कर एक कमरे में बंद कर दिया।

कुछ देर बाद कर्मचारियों ने खुद पुलिस को सूचना दी, लेकिन जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो कमरे के अंदर किशोरी मृत अवस्था में मिली।


स्थानीय लोगों का आरोप और आक्रोश

घटना की खबर आग की तरह फैली और कुछ ही देर में सैकड़ों स्थानीय लोग और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने घटना को गंभीर साजिश बताते हुए दोषियों की गिरफ्तारी और प्लांट को सील करने की मांग की।

स्थानीय निवासियों ने मृतका के साथ दुर्व्यवहार की आशंका भी जताई है। लोगों ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। कोतवाली परिसर में प्रदर्शन के बाद डोईवाला चौक पर घंटों जाम लगा रहा, जिससे ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ।


पुलिस का बयान और जांच की स्थिति

घटना की जांच में जुटे सीओ संदीप सिंह नेगी ने बताया कि,

“किशोरी की मौत के कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही चलेगा। फिलहाल सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।”

पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और प्लांट के कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।


प्रदर्शनकारी कर रहे ये मांगें:

  • मृत किशोरी के साथ क्या हुआ, इसकी निष्पक्ष और तेज़ जांच हो।
  • दोषी कर्मचारियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाए।
  • स्क्रीनिंग प्लांट को सील किया जाए ताकि साक्ष्य नष्ट न हों।
  • पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता और सुरक्षा दी जाए।

घटना ने फिर उठाए सवाल:

इस घटना ने एक बार फिर झुग्गी-बस्तियों के बच्चों की सुरक्षा और कूड़ा बीनने जैसी मजबूरी पर सवाल खड़े किए हैं।
क्या महज कबाड़ बीनने गई एक किशोरी की मौत को सिर्फ “दुर्घटना” माना जाएगा?
या इससे जुड़े संवेदनशील तथ्यों को बेपर्दा कर सख्त कदम उठाए जाएंगे?

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