हरिद्वार/नारसन बॉर्डर | 7 जुलाई 2025
श्रावण मास में शिवभक्ति चरम पर है, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था से जुड़ी संवेदनशीलता को लेकर एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया। सोमवार दोपहर नारसन बॉर्डर स्थित एक ढाबे पर खाने में प्याज और लहसुन के प्रयोग को लेकर कांवड़ियों ने जमकर हंगामा किया। मामला इतना बिगड़ा कि पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े और ढाबा अस्थायी रूप से बंद करवा दिया गया।
कैसे हुआ विवाद?
सोमवार करीब दोपहर 2 बजे, हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों का एक जत्था राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर स्थित नारसन बॉर्डर के एक ढाबे पर रुका। भोजन परोसे जाने के दौरान कांवड़ियों को जब पता चला कि खाने में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल किया गया है, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया।
बात बढ़ी, बहस बनी झड़प
ढाबा संचालक द्वारा सफाई देने की कोशिश की गई, लेकिन मामला गर्माता गया। कांवड़ियों और ढाबा स्टाफ के बीच तीखी बहस के बाद हंगामे का माहौल बन गया। स्थिति को बिगड़ता देख अन्य राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किया नियंत्रण
पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में लिया। ढाबे को तत्काल बंद कराया गया और शिवभक्तों को समझा-बुझाकर आगे की यात्रा के लिए रवाना किया गया।
पहले ही मिल चुका था नोटिस
पुलिस जांच में सामने आया कि ढाबा संचालक राजकुमार, निवासी ग्राम बकौली, थाना अलीपुर, को पहले ही यात्रा के मद्देनज़र निर्देश और नोटिस जारी किया गया था कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए सात्विक भोजन ही परोसा जाए। बावजूद इसके नियमों का उल्लंघन किया गया।
इस मामले में पुलिस ने:
- ढाबा मालिक राजकुमार
- शेफ शक्ति कुमार गौतम, निवासी बोझाहेड़ी थाना पुरकाजी
को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस का बयान:
नारसन चौकी प्रभारी ने बताया,
“कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्देशों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।”
प्रशासन सतर्क, होटल-ढाबों पर निगरानी बढ़ाई गई
इस घटना के बाद हरिद्वार प्रशासन ने सभी ढाबों और होटलों को फिर से निर्देशों की समीक्षा करने को कहा है। टीमों को भेजकर खाद्य सामग्री की जांच और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कांवड़ यात्रा में इस प्रकार की घटनाएं न केवल यात्रा की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनती हैं। प्रशासन द्वारा लगातार मॉनिटरिंग जारी है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।


