स्थान: श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड
तारीख: 14 जुलाई 2025
सावन का पहला सोमवार, और देवभूमि उत्तराखंड आज एक बार फिर भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठी।
सुबह से ही शिव भक्तों की लंबी कतारें हर छोटे-बड़े शिवालयों में दिखाई दीं। कमलेश्वर महादेव मंदिर, जो कि पांच महेश्वर पीठों में से एक माना जाता है, आज श्रद्धा और भक्ति का मुख्य केंद्र बना रहा।
सावन सोमवारी की शुरुआत – श्रद्धा और भक्ति का संगम
सावन माह का पहला सोमवार शिवभक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और साधना का परम अवसर होता है।
उत्तराखंड के कोने-कोने से आए श्रद्धालु आज गंगाजल, दूध, बेलपत्र और पंचामृत लेकर शिवालयों में उमड़े।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी इस शुभ अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन कर राज्यवासियों की समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना की।

कमलेश्वर महादेव मंदिर: आस्था का चिरस्थायी प्रतीक
श्रीनगर गढ़वाल स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर सावन में विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
यह मंदिर न केवल उत्तराखंड के शिवभक्तों के लिए पूजनीय है, बल्कि इसे सिद्धपीठ का दर्जा भी प्राप्त है।
“कमलेश्वर धाम में शिवभक्त जब निष्काम भाव से अभिषेक करते हैं, तो भगवान शिव कृपा से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।”
— महंत 108 आशुतोष पुरी
विशेष पूजन अनुष्ठान और महाआरती
सावन के सोमवारों में यहां परंपरागत रूप से:
- रुद्राभिषेक
- पंचामृत स्नान
- गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक
- बेलपत्र और पुष्प अर्पण
- मंत्रोच्चारण के साथ विशेष महाआरती का आयोजन होता है।
सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन और शिव स्तुति की गूंज बनी रही।
पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यता
- कहा जाता है कि श्रीराम ने यहीं 108 कमल पुष्प चढ़ाकर ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति के लिए रुद्राभिषेक किया था।
- भगवान विष्णु ने यहां सहस्त्र कमल अर्पित कर सुदर्शन चक्र प्राप्त किया।
- श्रीकृष्ण ने संतान कामना से यहीं विशेष दीपक पूजा की थी।
आज भी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी पर निसंतान दंपति विशेष पूजा करते हैं।
सावन के महीने में सवा लाख बेलपत्र अर्पण करने की परंपरा है, जिससे भक्त सुख, शांति और संतान की प्राप्ति की कामना करते हैं।
आत्मशुद्धि और मोक्ष का माध्यम बना सावन
कमलेश्वर मंदिर का वातावरण आज केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जाओं से भर गया।
यहां आने वाले भक्तों का कहना था कि इस पवित्र स्थल पर आकर मन को शांति और आत्मा को दिशा मिलती है।
“सावन शिव भक्ति के माध्यम से आत्ममंथन का समय है, जैसे शिव ने हलाहल पीकर लोक कल्याण किया, वैसे ही हम भी मन की नकारात्मकता को छोड़कर शुद्धि की ओर बढ़ते हैं।”
गैलरी
- जलाभिषेक करते श्रद्धालु
- महाआरती के दौरान भक्तों की भीड़
- CM धामी की शिव पूजा की झलकियां
- कमलेश्वर मंदिर का शृंगारित गर्भगृह
निष्कर्ष
सावन का पहला सोमवार उत्तराखंड में शिव भक्ति के पर्व जैसा मनाया गया।
शिवालयों में उमड़ी भीड़ और वातावरण में गूंजते “हर हर महादेव” के जयकारे इस बात के प्रमाण हैं कि शिव भक्ति आज भी जनमानस में जीवंत और गहरे तक व्याप्त है।


