घोषणा की तिथि: 6 मई 2025
रिपोर्ट: एजुकेशन ब्यूरो, देहरादून
उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करने की दिशा में श्रीमद्भगवद् गीता और रामायण को राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा में शामिल करने का निर्णय लिया है।
इस ऐतिहासिक फैसले की घोषणा 6 मई 2025 को तब हुई, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री को राज्य पाठ्यचर्या की नई रूपरेखा से अवगत कराया गया।
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर लिया गया निर्णय
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भारतीय संस्कृति की जड़ें शिक्षा में गहराई से उतरें। उनके निर्देश पर श्रीमद्भगवद् गीता और रामायण को राज्य के विद्यालयी पाठ्यक्रम का हिस्सा बना दिया गया है। इसके लिए नई पाठ्यपुस्तकों को आगामी शैक्षणिक सत्र (2025-26) से लागू किया जाएगा।
शिक्षा में गीता और रामायण का समावेश – सिर्फ धार्मिक नहीं, वैज्ञानिक भी
डॉ. मुकुल कुमार सती, निदेशक (माध्यमिक शिक्षा), ने बताया:
“श्रीमद्भगवद् गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक जीवन विज्ञान, मनोविज्ञान, तर्कशास्त्र और व्यवहार शास्त्र से भरपूर ग्रंथ है, जो छात्रों को न केवल नैतिक मूल्य, बल्कि नेतृत्व क्षमता, तनाव प्रबंधन, निर्णय लेने की क्षमता और विवेकपूर्ण जीवन शैली भी सिखा सकता है।”
क्या बदलेगा स्कूलों में?
- गीता और रामायण से प्रेरित अध्याय पाठ्यपुस्तकों में शामिल होंगे
- शिक्षकों को दिए जाएंगे विशेष प्रशिक्षण ताकि वे श्लोकों के आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या कर सकें
- छात्रों में आत्म-नियंत्रण, चारित्रिक विकास, भारतीय दृष्टिकोण व वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलेगा
- सप्ताह का श्लोक कार्यक्रम पहले से जारी, जो नई पाठ्यचर्या से जुड़ेगा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दिशा में बड़ा कदम
इस निर्णय के साथ उत्तराखंड उन राज्यों की अग्रिम पंक्ति में आ गया है जो भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा का मूल आधार बना रहे हैं। शिक्षा निदेशक ने यह भी कहा कि कक्षा-वार नई किताबों का विकास राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप किया जा रहा है।


