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Uttarakhand News | जातीय जनगणना 2027 का रोडमैप तैयार: हिमालयी राज्यों में 1 अक्टूबर से होगी शुरुआत, दो चरणों में होगी प्रक्रिया

हरिद्वार/नई दिल्ली | 30 जुलाई 2025

जनगणना 2027 की तैयारी अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है और इसका आगाज हिमालयी राज्यों से होगा। हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जातीय जनगणना 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी


जनगणना 2027: दो चरणों में होगी प्रक्रिया

गृह राज्यमंत्री राय ने लोकसभा में दिए लिखित जवाब में बताया कि आगामी जनगणना को दो स्पष्ट चरणों में संपन्न किया जाएगा:

पहला चरण: मकान सूचीकरण और गणना

  • हर परिवार की आवासीय स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं, संपत्ति की स्थिति आदि दर्ज की जाएंगी।
  • यह चरण योजनाओं की आधारभूत जरूरतों की पहचान के लिए अहम होगा।

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना

  • इसमें जाति, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और अन्य जनसांख्यिकीय आंकड़ों को संकलित किया जाएगा।
  • विशेष बात यह है कि इस बार जाति-आधारित आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे, जिससे सामाजिक योजनाएं अधिक लक्षित बन सकेंगी।

महत्वपूर्ण तिथियां

  • हिमालयी क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि: 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि
  • अन्य सामान्य क्षेत्रों के लिए: 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि

सांसद त्रिवेंद्र रावत का बयान

“जनगणना सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि यह विकास की बुनियादी योजना का आधार होती है,” त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा।
उन्होंने जातीय जनगणना को शामिल करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह सामाजिक न्याय, योजना निर्माण और संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण की दिशा में अहम कदम है।


क्या कहा केंद्र सरकार ने?

  • एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) को अपडेट करने का कोई निर्णय फिलहाल नहीं लिया गया है।
  • केवल जनगणना की अधिसूचना जारी की गई है।
  • मकान सूचीकरण की संचालन तिथियां उचित समय पर अधिसूचित की जाएंगी।
  • वित्तीय परिव्यय (Budget Allocation) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।

डिजिटल और डेटा पारदर्शिता की ओर बढ़ता भारत

यह जनगणना प्रक्रिया पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करेगी। डेटा कलेक्शन और विश्लेषण पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक और ट्रांसपेरेंट सिस्टम के जरिए होगा। इससे न केवल जनसंख्या की सही तस्वीर सामने आएगी बल्कि विकसित भारत 2047 के विजन को ठोस आधार मिलेगा।


विशेष जानकारी संक्षेप में:

बिंदुविवरण
जनगणना प्रारंभ1 अक्टूबर 2026 (हिमालयी क्षेत्र)
चरण2 (मकान सूचीकरण और जनसंख्या गणना)
जातीय जानकारीइस बार शामिल होगी
तकनीकडिजिटल और पारदर्शी
बजटजल्द घोषित किया जाएगा
एनपीआरअपडेट नहीं होगा

निष्कर्ष:
जनगणना 2027 सिर्फ एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि यह एक डिजिटल, समावेशी और रणनीतिक विकास का रोडमैप है। उत्तराखंड जैसे राज्य जहां भौगोलिक और सामाजिक विविधता अधिक है, वहां यह प्रक्रिया आगामी योजनाओं की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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