प्रकाशित तिथि: 30 जुलाई 2025
स्थान: देहरादून
अब देहरादून से दिल्ली का सफर केवल ढाई घंटे में!
देश की एक और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना अपने अंतिम चरण में है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री जयराम रमेश ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे अक्टूबर 2025 तक तैयार हो जाएगा। इसके बाद वाहन इस एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भर सकेंगे।
प्रोजेक्ट का महत्व
देहरादून और दिल्ली के बीच सफर में लगने वाले समय को लगभग 5-6 घंटे से घटाकर मात्र ढाई घंटे करने की क्षमता रखने वाला यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में संपर्क व्यवस्था को एक नई दिशा देगा।
पर्यावरणीय प्रभाव और पुनर्स्थापन
इस परियोजना के लिए कुल 17,913 पेड़ों की कटाई की गई है। लेकिन इसके साथ ही पर्यावरणीय पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है:
- 157.2 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण किया जा रहा है।
- ₹22.05 करोड़ की लागत से यह काम संबंधित वन विभागों द्वारा किया जा रहा है।
- इसके अलावा, एनएचएआई द्वारा 50,600 पौधे लगाए जा चुके हैं।
- शिवालिक वन प्रभाग (उत्तर प्रदेश) और देहरादून वन प्रभाग को पुनर्स्थापन के लिए ₹40 करोड़ की राशि जारी की गई है।
सुरक्षा के विशेष इंतजाम
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मंत्री के अनुसार, भारतीय सड़क कांग्रेस के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, लैंडस्लाइड रिडक्शन तकनीकों का उपयोग किया गया है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रोजेक्ट की विशेषताएं संक्षेप में:
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| परियोजना | देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे |
| पूरा होने की संभावित तिथि | अक्टूबर 2025 |
| कुल पेड़ कटे | 17,913 |
| पुनर्वनीकरण क्षेत्र | 157.2 हेक्टेयर |
| खर्च (पौधरोपण पर) | ₹22.05 करोड़ |
| कुल पौधे लगाए गए | 50,600 |
| पर्यावरण फंडिंग | ₹40 करोड़ |
क्या बोले मंत्री?
“हमारा प्रयास है कि इस वर्ष अक्टूबर तक यह महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे पूरा हो, जिससे उत्तराखंड और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी एक नई ऊंचाई पर पहुंचे।”
— जयराम रमेश, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री
निष्कर्ष
इस एक्सप्रेसवे से उत्तर भारत की यात्राएं न सिर्फ तेज़ होंगी, बल्कि सुरक्षित और पर्यावरण संतुलन के साथ होंगी। अब देखना यह है कि निर्धारित समय-सीमा पर यह प्रोजेक्ट पूरी तरह कार्यान्वित हो पाता है या नहीं।


