देहरादून, 25 अक्टूबर 2025
उत्तराखंड सरकार समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) के तहत लिव-इन संबंधों के पंजीकरण में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि नागरिकों की निजता के अधिकार (Right to Privacy) का उल्लंघन न हो और कानून अधिक संवेदनशील व व्यावहारिक रूप से लागू हो सके।
कोर्ट में सरकार ने दिया शपथ पत्र
गृह विभाग ने हाल ही में न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल करते हुए कहा है कि लिव-इन संबंधों के पंजीकरण के नियमों में शिथिलता दी जा सकती है। यह शपथ पत्र उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है, जिनमें कहा गया था कि मौजूदा लिव-इन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया व्यक्ति की निजता में हस्तक्षेप करती है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि विवाह और लिव-इन रजिस्ट्रेशन संबंधी नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन किए जा सकते हैं ताकि किसी की व्यक्तिगत जानकारी अनावश्यक रूप से सार्वजनिक न हो।
क्या हैं प्रस्तावित बदलाव?
सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग ने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर विचार किया है जिनमें शामिल हैं:
- पहले लिव-इन या तलाकशुदा होने की जानकारी देने से छूट।
- लिव-इन संबंध समाप्त होने के बाद गर्भधारण या बच्चे के जन्म की सूचना देने की अनिवार्यता समाप्त करना।
- लिव-इन में शामिल अन्य संबंधों की जांच व्यवस्था हटाना।
- बालिग जोड़ों के लिव-इन संबंध की सूचना उनके अभिभावकों को देने का नियम खत्म करना।
- आधार कार्ड की अनिवार्यता में भी छूट देने पर विचार।
इन प्रावधानों में संशोधन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वयस्कों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता से समझौता न हो।
निजता और कानून के बीच संतुलन
प्रदेश में UCC कानून पहले ही लागू किया जा चुका है, जिसके तहत विवाह पंजीकरण और लिव-इन संबंधों की सूचना अनिवार्य की गई थी। लेकिन कुछ नागरिकों ने इसे निजता के उल्लंघन के रूप में देखा और अदालत का रुख किया।
गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि,
“सरकार का प्रयास है कि कानून के प्रावधान नागरिकों की निजता से टकराव न करें। इसी आधार पर नियमावली में आवश्यक बदलाव की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।”
क्या होगा आगे?
सूत्रों के अनुसार, सरकार जल्द ही नई नियमावली का प्रारूप तैयार कर न्याय विभाग और कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजेगी। इसके बाद संशोधित नियम ऑनलाइन पोर्टल पर लागू किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम UCC को अधिक संतुलित और नागरिक-अनुकूल बनाएगा। लिव-इन संबंधों में रहने वाले जोड़ों को अब अपनी निजी जानकारी साझा करने को लेकर डर नहीं रहेगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला सामाजिक संवेदनशीलता और कानूनी पारदर्शिता के बीच संतुलन साधने का प्रयास है। लिव-इन रजिस्ट्रेशन में प्रस्तावित छूट से जहां नागरिकों के निजता अधिकार को सम्मान मिलेगा, वहीं सरकार की जवाबदेही और कानून व्यवस्था भी बरकरार रहेगी।


