स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तिथि: 16 नवंबर 2025
देहरादून में मौसम का मिजाज बदलते ही बच्चों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। रात के समय तापमान में अचानक गिरावट और वातावरण में बढ़ती नमी के कारण सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त और बुखार से परेशान बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
ओपीडी में दबाव बढ़ा, संख्या 60 से बढ़कर 140 तक पहुंची
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल रोग विभाग में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुनी हो गई है।
जहां सामान्य दिनों में 60–80 बच्चे ओपीडी में आते थे, वहीं इन दिनों यह आंकड़ा 120–140 तक पहुंच रहा है।
अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. अशोक कुमार के अनुसार, हर सप्ताह सोमवार से बुधवार के बीच बच्चों को लेकर आने वाले अभिभावकों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है।
रात में तापमान गिरने से बढ़ रहीं समस्याएं
चिकित्सकों का कहना है कि दिन में हल्की धूप तो रहती है, लेकिन रात में तापमान तेजी से गिर रहा है, जिससे छोटे बच्चों को शरीर का तापमान संतुलित रखने में परेशानी हो रही है।
इसका असर खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर अधिक देखने को मिल रहा है।
सर्दी-जुकाम से वायरल तक—बच्चों में बढ़ रहे लक्षण
बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले अभिभावकों की अधिकतर शिकायतें—
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सर्दी-जुकाम
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खांसी
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तेज बुखार
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वायरल इन्फेक्शन
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भूख न लगना
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उल्टी और दस्त
इनके अलावा त्वचा और सांस से संबंधित बीमारियां भी बढ़ रही हैं।
कमजोर इम्युनिटी वाला मौसम: बच्चों को अधिक सतर्कता की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम में बच्चों का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर पड़ जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
ऐसे समय में बच्चों को गर्म कपड़े, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन, तथा जंक फूड से दूर रखना बहुत जरूरी है।
प्रदूषण और दूषित हवा ने बढ़ाया खतरा
जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डा. प्रवीण पंवार बताते हैं कि दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का असर भी अधिक दिख रहा है।
धूलकण और नमी जमीन के पास आ जाते हैं, जिससे हवा दूषित हो जाती है, और छोटे बच्चों में सर्दी, खांसी और सिरदर्द की समस्याएं तेज़ी से बढ़ती हैं।
इस मौसम में कौन-कौन सी बीमारियां पनपती हैं
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सर्दी, खांसी और गले में खराश
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वायरल बुखार
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उल्टी-दस्त
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त्वचा संबंधी संक्रमण
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सांस संबंधी दिक्कतें
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पाचन तंत्र की समस्याएं
बच्चों की सुरक्षा के लिए डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह
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सुबह-शाम अधिक ठंड होने पर पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाएं।
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बच्चों को बाहर के खाने से बचाएं, घर का सादा व पौष्टिक भोजन दें।
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जितना हो सके बच्चे को गुनगुना पानी पिलाएं और पर्याप्त आराम कराएं।
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विटामिन C, तरल पदार्थ और गर्म सूप का सेवन बढ़ाएं।
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बच्चों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से परहेज करें।
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हाथ धोने की आदत डालें और कपड़े-सामान साफ रखें।
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सर्दी में भाप या ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
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लक्षण बढ़ने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं।
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किसी भी वायरल या संक्रमण की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह दवा न दें।
निष्कर्ष
मौसम परिवर्तन के इस दौर में बच्चों को विशेष देखभाल और सतर्कता की आवश्यकता है।
यदि समय रहते आवश्यक सावधानियां बरती जाएं—गर्म कपड़े, पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और चिकित्सकीय परामर्श—तो बढ़ते संक्रमण से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माता-पिता से अपील की है कि किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दें।


