कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) | उत्तराखंड | दिनांक: 7 दिसंबर 2025
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को उत्तराखंड के कोटद्वार पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध सिद्धबली मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर बाबा सिद्धबली का आशीर्वाद लिया। आध्यात्मिक यात्रा के बाद मुख्यमंत्री पारिवारिक दायित्व निभाते हुए अपनी बहन से मिलने गाड़ीघाट क्षेत्र पहुंचे।
हेलिकॉप्टर से आगमन, दोपहर में पहुंचे सिद्धबली धाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हेलिकॉप्टर से कोटद्वार के ग्रास्टनगंज हेलीपैड पर उतरे। इसके बाद वह कार से लगभग दोपहर 2:45 बजे सिद्धबली मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में पहुंचते ही उन्होंने बाबा सिद्धबली के समक्ष नतमस्तक होकर करबद्ध प्रार्थना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
लैंसडौन विधायक महंत दिलीप रावत ने किया स्वागत
मंदिर प्रांगण में सीएम योगी का स्वागत लैंसडौन विधायक महंत दिलीप रावत ने किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को मंदिर परिसर में ले जाकर दर्शन कराए और पूजा कार्यक्रम में सहयोग किया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और अनुशासन का वातावरण देखने को मिला।
प्रशासन ने पहले से की थी चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था
मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व ही पौड़ी जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मंदिर पहुंचने से कुछ समय पहले आसपास के क्षेत्र को खाली कराते हुए सुरक्षा घेरा बनाया गया। मंदिर परिसर और आसपास पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद रहे।
बहन से मिलने पहुंचे, जीजा के निधन पर जताया शोक
मंदिर दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोटद्वार के गाड़ीघाट क्षेत्र में अपनी बहन कौशल्या देवी के आवास पहुंचे। उन्होंने अपने जीजा ओमप्रकाश रावत के हाल ही में हुए निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और बहन को ढांढस बंधाया। इस दौरान परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर संवेदनाएं प्रकट कीं।
गाड़ीघाट क्षेत्र में भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम
मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए गाड़ीघाट क्षेत्र में भी प्रशासन की ओर से सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। कई मार्गों पर रूट डायवर्जन, अवरोधक और वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगाई गई थी, जिससे दौरे के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
निष्कर्ष
कोटद्वार दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कार्यक्रम आध्यात्मिक श्रद्धा और पारिवारिक संवेदना का संगम रहा। सिद्धबली बाबा के दर्शन के साथ जहां उन्होंने आस्था प्रकट की, वहीं बहन से मिलकर पारिवारिक दायित्व निभाते हुए मानवीय संवेदना का परिचय दिया। प्रशासनिक दृष्टि से भी यह दौरा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।


