देहरादून | 18 दिसंबर 2025
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को समान और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक अहम घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी मदरसों और अल्पसंख्यक विद्यालयों में अब उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। यह निर्णय अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने और उनके भविष्य को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
छात्र हित में सरकार के ठोस कदम
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार छात्र हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर आवश्यक और दूरगामी फैसले ले रही है। शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए नीतियों को व्यवहारिक रूप दिया जा रहा है, ताकि हर छात्र को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके और वह प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सके।
अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए नया कानून लागू
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया गया है। इस कानून के माध्यम से शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, पाठ्यक्रम की एकरूपता और छात्रों के शैक्षणिक विकास को सुनिश्चित किया जाएगा।
समान नागरिक संहिता से सामाजिक न्याय को बढ़ावा
विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर राज्य ने सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में पूरे देश को एक नई दिशा दिखाई है। उन्होंने इसे समाज में समान अधिकार और समरसता स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहन योजना
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक प्रोत्साहन योजना के तहत अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। इसका उद्देश्य युवाओं को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।
निष्कर्ष
सरकार के इन फैसलों से प्रदेश के मदरसों और अल्पसंख्यक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को आधुनिक, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू होने से छात्रों के शैक्षणिक स्तर में सुधार होगा और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में बेहतर तरीके से भाग ले सकेंगे। यह कदम शिक्षा के माध्यम से समावेशी विकास और सामाजिक समानता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।


