तारीख: 23 दिसंबर 2025
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
देहरादून। चैंबर निर्माण की मांग को लेकर देहरादून के अधिवक्ताओं ने सोमवार को राजधानी के सबसे व्यस्त चौराहे घंटाघर पर जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं के तीन घंटे तक सड़क पर बैठने से राजपुर रोड, बुद्धा चौक, चकराता रोड और तहसील चौक तक लंबा जाम लग गया। वाहनों की कतारें कई किलोमीटर तक फैल गईं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रैली के रूप में पहुंचे घंटाघर
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत अधिवक्ता सुबह बार भवन में एकत्र हुए। इसके बाद वे रैली की शक्ल में तहसील चौक, दर्शन लाल चौक होते हुए घंटाघर पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। अधिवक्ताओं के बैठते ही यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। स्थिति ऐसी रही कि पुलिस भी जाम खुलवाने में असमर्थ नजर आई।
लंबे समय से चल रहा है आंदोलन
अधिवक्ता बीते कई दिनों से हरिद्वार रोड स्थित नए कोर्ट परिसर के बाहर चैंबर निर्माण की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार को आंदोलन को और तेज करते हुए उन्होंने शहर के केंद्र में जाम लगाकर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष का सरकार पर आरोप
बार एसोसिएशन देहरादून के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं के लिए चैंबर निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा—
“उत्तराखंड आंदोलन में अधिवक्ताओं ने अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन आज उन्हीं के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री से सीधी मांग
अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं बार भवन पहुंचकर चैंबर निर्माण की घोषणा करें, तो अधिवक्ता उसी समय अपने कार्य पर लौट आएंगे। उन्होंने कहा कि बेंच और बार न्याय व्यवस्था के दो पहिये हैं। न्यायालय की भव्य इमारतें तो बन गईं, लेकिन अधिवक्ताओं के बैठने और काम करने के लिए चैंबर नहीं बनाए गए।
आम लोगों की सुविधाओं का भी उठाया मुद्दा
मनमोहन कंडवाल ने कहा कि न्यायालय में रोजाना हजारों लोग आते हैं, लेकिन उनके बैठने, चाय-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अधिवक्ताओं और आम जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द समाधान निकाला जाए।
जाम के दौरान हुई झड़प
प्रदर्शन के दौरान घंटाघर पर एक व्यक्ति और कुछ अधिवक्ताओं के बीच किसी बात को लेकर झड़प हो गई। माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया, हालांकि पुलिस और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्तक्षेप से स्थिति पर काबू पा लिया गया।
बाद में बार भवन लौटे अधिवक्ता
करीब तीन घंटे बाद अधिवक्ता प्रदर्शन समाप्त कर बार भवन लौट गए, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका। इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता आंदोलन में शामिल रहे।
निष्कर्ष
चैंबर निर्माण को लेकर अधिवक्ताओं का यह आंदोलन सरकार के लिए स्पष्ट चेतावनी है। यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है, जिसका असर न्यायिक कार्यों के साथ-साथ आम जनजीवन पर भी पड़ेगा।


