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मेडिकल शिक्षा को बड़ी राहत, अब 62 वर्ष तक बन सकेंगे प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर

देहरादून | 25 दिसंबर 2025

उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय से चली आ रही फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति के लिए आयु सीमा बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। कैबिनेट के इस निर्णय से अनुभवी चिकित्सकों को उच्च शिक्षा में योगदान देने का अवसर मिलेगा और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।


कैबिनेट बैठक में चिकित्सा शिक्षा नियमावली में संशोधन

बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली प्रस्तुत की गई। इसमें बताया गया कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के लगभग 40 प्रतिशत पद वर्तमान में रिक्त हैं। पहले नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष होने के कारण योग्य और अनुभवी अभ्यर्थी आवेदन से वंचित रह जाते थे।


रिटायरमेंट उम्र 65 वर्ष, इसलिए बढ़ाई गई आवेदन आयु

कैबिनेट को अवगत कराया गया कि मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की सेवानिवृत्ति आयु पहले से ही 65 वर्ष है। ऐसे में नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा को 62 वर्ष करना व्यावहारिक और आवश्यक कदम माना गया। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, जिससे जल्द ही रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।


सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के लिए अलग विभागों का गठन

नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के नियमों के अनुरूप राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के लिए अलग-अलग विभागों के गठन को भी स्वीकृति दी गई है। इससे सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों और सेवाओं को मजबूती मिलेगी और मरीजों को राज्य में ही बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा।


पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती पर 50% अतिरिक्त भत्ता

कैबिनेट ने पर्वतीय, दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती को प्रोत्साहित करने के लिए एक और अहम फैसला लिया है। इन क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को अब वेतन मेट्रिक्स लेवल में न्यूनतम वेतन का 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता मिलेगा। सरकार का मानना है कि अधिक खर्च और सीमित सुविधाओं के कारण डॉक्टर इन क्षेत्रों में जाने से कतराते हैं, जिसे यह भत्ता संतुलित करेगा।


भत्ते को लेकर शर्तें भी तय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त भत्ता केवल क्लीनिकल कार्य करने वाले चिकित्सकों को ही मिलेगा। इसे पेंशन या सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानी क्षेत्रों में संबद्ध चिकित्सकों को यह भत्ता नहीं मिलेगा।


श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के संविदा कर्मियों का मामला उपसमिति को

राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में कार्यरत 277 संविदा, दैनिक वेतन, नियत वेतन और प्रबंधन समिति के माध्यम से कार्यरत कर्मियों को समान पद–समान वेतन देने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की उपसमिति पर छोड़ दिया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को विस्तृत विचार के लिए उपसमिति को सौंपा गया है।


निष्कर्ष

कैबिनेट के ये फैसले उत्तराखंड की मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। जहां एक ओर आयु सीमा बढ़ाने से अनुभवी फैकल्टी की कमी दूर होगी, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में अतिरिक्त भत्ते से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे न केवल मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि आम जनता को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।

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