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दून अस्पताल में आईसीयू शिफ्टिंग के दौरान बुजुर्ग की मौत, परिजनों का हंगामा

देहरादून | 26 दिसंबर 2025

देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार के दौरान एक बुजुर्ग मरीज की मौत से हड़कंप मच गया। आरोप है कि इमरजेंसी से आईसीयू में शिफ्ट किए जाने के दौरान मरीज को आवश्यक ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया गया, जिससे उनकी जान चली गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया।


सांस की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे 90 वर्षीय मरीज

जानकारी के अनुसार, चंद्रबनी चोईला निवासी 90 वर्षीय जौहरी पाल को सांस की गंभीर समस्या और दिमाग की नस से जुड़ी बीमारी के चलते बुधवार को दून अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी और वह ऑक्सीजन पर निर्भर थे।


आईसीयू बेड के लिए घंटों इंतजार, फिर शुरू हुई शिफ्टिंग

मृतक के बेटे वीरेंद्र और पोते पंकज ने बताया कि गुरुवार को डॉक्टरों ने मरीज को इमरजेंसी से आईसीयू में शिफ्ट करने की सलाह दी थी। इसके लिए दोपहर में 1700 रुपये की पर्ची भी कटवाई गई, लेकिन करीब चार घंटे तक आईसीयू में बेड उपलब्ध नहीं हुआ। देर रात एक बेड खाली होने पर मरीज को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।


ऑक्सीजन फ्लोमीटर न लगाने का आरोप

परिजनों का आरोप है कि आईसीयू में ले जाते समय मरीज को ऑक्सीजन फ्लोमीटर नहीं लगाया गया, जबकि वह पहले से ही सांस की बीमारी से पीड़ित थे। शिफ्टिंग के दौरान ही मरीज की तबीयत और बिगड़ गई और रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।


मौत के बाद हंगामा, डॉक्टरों पर बदसलूकी का आरोप

मरीज की मौत के बाद परिजन एकत्र हो गए और अस्पताल में विरोध जताने लगे। आरोप है कि जब परिजनों ने घटना का वीडियो बनाना शुरू किया तो डॉक्टरों ने उन्हें रोक दिया और अस्पताल से बाहर जाने की चेतावनी दी। इस दौरान कहासुनी बढ़ गई और कथित तौर पर एक डॉक्टर के गुस्से में आ जाने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।


अस्पताल प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुशील ओझा ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। संबंधित चिकित्सकों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष

दून अस्पताल में हुई यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। परिजनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच अब बेहद अहम है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मरीज की मौत लापरवाही का परिणाम थी या परिस्थितिजन्य दबाव का। फिलहाल, प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।

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