ऋषिकेश/देहरादून/कर्णप्रयाग (उत्तराखंड) | 4 जनवरी 2026
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है। न्याय की मांग और कथित वीआईपी के नाम उजागर करने को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किए। अलग-अलग जिलों में कांग्रेस और उसके संगठनों ने सड़कों पर उतरकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
ऋषिकेश में महिला कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन
ऋषिकेश में महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट के आवास का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जवाब मांगा और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।
वीआईपी के नाम पर सरकार की चुप्पी पर सवाल
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल कथित वीआईपी के नाम को लेकर प्रदेश सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास कर रही है और भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि वह वीआईपी आखिर कौन है।
सीबीआई जांच की मांग, पुलिस रही अलर्ट
प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए यमकेश्वर विधायक के आवास के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। महिला कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहराई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की।
कर्णप्रयाग में भाजपा का पलटवार
वहीं, कर्णप्रयाग में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर कांग्रेस सरकार का पुतला फूंका। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से सबूत सामने लाने की मांग की और आरोप लगाया कि कांग्रेस बेवजह दिवंगत अंकिता के नाम पर राजनीति कर रही है। भाजपा ने कहा कि यदि कांग्रेस के पास कोई ठोस सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
देहरादून में एनएसयूआई का प्रदर्शन
देहरादून में एनएसयूआई छात्र संगठन ने अंकिता भंडारी हत्याकांड और एंजेल चकमा की हत्या में न्याय की मांग को लेकर डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। साथ ही निजी विश्वविद्यालयों द्वारा शिक्षा के कथित बाजारीकरण के विरोध में भी नारेबाजी की गई।
यमुना कॉलोनी चौक पर पुतला दहन
देहरादून के यमुना कॉलोनी चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार का पुतला फूंका और आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मामलों में जवाबदेही से बच रही है।
निष्कर्ष
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक ओर कांग्रेस वीआईपी के नाम उजागर करने और सीबीआई जांच की मांग पर अड़ी है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास बता रही है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से साफ है कि यह मामला फिलहाल शांत होने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत में इसकी गूंज और तेज हो सकती है।



