डोईवाला (देहरादून) | 5 जनवरी 2026
डोईवाला क्षेत्र के लच्छीवाला गांव में हाथी की लगातार आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले तीन दिनों से आबादी क्षेत्र में हाथी की चहलकदमी के चलते लोग दहशत में हैं। हाथी से जान-माल के साथ-साथ किसानों की फसलों को भारी नुकसान होने का खतरा बना हुआ है।
फसलें रौंद रहा हाथी, हर पल बनी रहती है अनहोनी की आशंका
ग्रामीणों के अनुसार हाथी देर शाम और रात के समय गांव की ओर आ जाता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में भय का माहौल है। हाथी कई किसानों की खड़ी फसलों को रौंद चुका है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करना और रात के समय घरों से बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है।
हाथी दीवार बनी बेअसर, आसानी से आबादी में कर रहा प्रवेश
वन विभाग द्वारा हाथियों को रोकने के लिए बनाई गई हाथी दीवार भी इस समस्या को नियंत्रित नहीं कर पा रही है। दीवार की ऊंचाई कम होने के कारण हाथी उसे फांदकर आसानी से आबादी क्षेत्र में प्रवेश कर जा रहा है। इससे वन विभाग की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, वन विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग
स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने वन विभाग के रेंजर के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की कि हाथियों की आबादी क्षेत्र में आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रेम सिंह पम्मीराज ने बताया कि लगातार हाथी के गांव में आने से लोगों में डर व्याप्त है और किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं।
रात में घरों के पास पहुंचा हाथी, गन्ने की फसल को किया तबाह
गुरुवार देर रात हाथी गांव के घरों के पास से गुजरता हुआ ईश्वर प्रसाद के गन्ने के खेत में पहुंच गया, जहां उसने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। जान बचाने के लिए ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर हाथी को जंगल की ओर भगाया।
ग्रामीणों में बढ़ रहा भय, मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका
लगातार घटनाओं से क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
लच्छीवाला में हाथी की लगातार चहलकदमी ने वन विभाग और प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। हाथी दीवार की मजबूती, निगरानी व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई अब समय की जरूरत बन गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग जल्द प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।


