देहरादून | 5 जनवरी 2026
नववर्ष के जश्न के दौरान सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। शराब पीकर वाहन चलाने वाले 101 चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। ये सभी चालक 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक चले विशेष अभियान के दौरान पकड़े गए थे।
तीन दिवसीय विशेष अभियान, दुर्घटनाओं पर अंकुश रहा उद्देश्य
परिवहन विभाग ने नए साल पर होने वाले कार्यक्रमों और बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए प्रदेशभर में विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और आम लोगों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
नशे में वाहन चलाने पर जीरो टॉलरेंस
अभियान के दौरान विभाग ने नशे में ड्राइविंग पर विशेष फोकस किया। इसके लिए 45 नए एल्कोमीटर प्रदेश के विभिन्न जिलों में उपलब्ध कराए गए। तीन दिनों में कुल 101 वाहन चालक शराब के नशे में वाहन चलाते हुए पकड़े गए। मौके पर ही चालान काटे गए और संबंधित वाहनों को सीज किया गया।
मानवीय पहल भी आई सामने
सख्ती के साथ विभाग ने मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया। जिन वाहन चालकों में अत्यधिक नशा पाया गया, उन्हें वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी गई और सुरक्षित रूप से घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
हरिद्वार में सबसे ज्यादा मामले
अभियान के दौरान हरिद्वार जिले में सबसे अधिक 49 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा उधम सिंह नगर में 24, देहरादून में 7 और अन्य जिलों में भी कार्रवाई की गई।
जिलेवार कार्रवाई का ब्यौरा
- देहरादून – 07
- हरिद्वार – 49
- उधम सिंह नगर – 24
- टनकपुर – 05
- हल्द्वानी – 02
- पौड़ी – 05
- रुद्रप्रयाग – 01
- अल्मोड़ा – 01
कुल – 101
अधिकारियों की दो टूक चेतावनी
उप परिवहन आयुक्त शैलेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी और लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया तय नियमों के तहत की जाएगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में नशे में ड्राइविंग के खिलाफ यह सख्त कदम सड़क सुरक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है। परिवहन विभाग का यह संदेश साफ है कि जश्न के नाम पर कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे, ताकि प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके।


