देहरादून | 07 जनवरी 2026
उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को एकरूप और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) को मंजूरी मिलने के बाद अब प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालय एक समान समय पर संचालित होंगे। नए निर्णय के तहत अब सभी सरकारी स्कूल सुबह 8:50 बजे खुलेंगे और दोपहर 3:15 बजे छुट्टी होगी।
इस फैसले के साथ ही शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी में वर्षों से चला आ रहा अंतर समाप्त हो जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की अनुशंसा पर लिया गया यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (एनईपी-2020) के अनुरूप बताया जा रहा है।
6.5 घंटे की पढ़ाई, 220 शिक्षण दिवस अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत छात्रों को प्रतिदिन औसतन 6.5 घंटे का शैक्षणिक समय मिलेगा। विद्यालयों में प्रतिदिन 25 मिनट की प्रार्थना सभा और 40 मिनट का आंतरिक अवकाश निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही पूरे शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस अनिवार्य किए गए हैं।
वर्तमान स्थिति में प्रदेश के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में 200 दिन भी पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही थी, जो एनईपी-2020 के मानकों के अनुरूप नहीं थी। इसी कमी को दूर करने के लिए शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन दीर्घ अवकाशों में कटौती के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
16 जनवरी से मॉडल के रूप में लागू होगी नई समय-सारिणी
नई समय-सारिणी को शीतकालीन अवकाश के बाद कुछ चयनित विद्यालयों में 16 जनवरी से मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा। इसके अनुभव और प्रभाव के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
कक्षा 11 से विषय चयन की मिलेगी आज़ादी
बैठक में यह भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अब कक्षा 11 से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दी जाएगी। इससे छात्र अपनी अभिरुचि के अनुरूप अध्ययन कर सकेंगे और भविष्य की तैयारी बेहतर ढंग से कर पाएंगे।
यह निर्णय एससीईआरटी सभागार में आयोजित बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता एससीईआरटी की निदेशक बंदना गर्ब्याल ने की। बैठक में अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी, सीमेट के विशेषज्ञ डॉ. मोहन बिष्ट, डॉ. अंकित जोशी, डॉ. रमेश बड़ोनी सहित माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने सुझाव रखे।
शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन में होगा सुधार
एससीईआरटी निदेशक बंदना गर्ब्याल ने बताया कि एनईपी के तहत प्रतिदिन न्यूनतम 6 घंटे 25 मिनट का कार्यदिवस निर्धारित किया गया है। यह नई समय-सारिणी विद्यालयों की कार्य संस्कृति, अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में स्कूल टाइमिंग को लेकर लिया गया यह निर्णय राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार माना जा रहा है। एक समान समय-सारिणी, 220 शिक्षण दिवस और छात्रों को विषय चयन की स्वतंत्रता जैसे प्रावधान न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएंगे, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आने वाले समय में यह फैसला प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।


