देहरादून | 07 जनवरी 2026
उत्तराखंड के श्रद्धालुओं और पर्यटन के लिहाज से एक बड़ी सौगात सामने आई है। तीर्थनगरी ऋषिकेश से भगवान नीलकंठ महादेव तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से हरी झंडी मिल गई है। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 6.5 किलोमीटर लंबा रोपवे अब श्रद्धालुओं को मात्र 15 मिनट में नीलकंठ महादेव धाम तक पहुंचाएगा।
वर्तमान में ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 30 किलोमीटर की घुमावदार सड़क यात्रा करनी पड़ती है या फिर लगभग नौ किलोमीटर का पैदल ट्रेक तय करना होता है। पर्व और श्रावण मास में भारी भीड़ के चलते यह यात्रा और भी कठिन हो जाती है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने रोपवे परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया था।
आधुनिक तकनीक से बनेगा रोपवे, यात्रा होगी सुरक्षित और सुगम
ऋषिकेश के त्रिवेणीघाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनने वाला यह रोपवे मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला तकनीक से तैयार किया जाएगा, जिसे अत्यधिक सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है। इस परियोजना के नोडल एजेंसी के रूप में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को नामित किया गया है।
रोपवे के निर्माण से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि ऋषिकेश शहर में लगने वाले यातायात जाम से भी काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों के लिए नीलकंठ महादेव की यात्रा अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी।
वन क्षेत्र में निर्माण को लेकर मिली अंतिम मंजूरी
चूंकि रोपवे का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजरेगा, इसलिए पहले राज्य वन्यजीव बोर्ड से वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति ली गई थी। इसके बाद प्रस्ताव को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के पास भेजा गया, जहां से अब अंतिम मंजूरी मिल गई है। इससे परियोजना के जल्द धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो गया है।
चौरासी कुटी का होगा जीर्णोद्धार, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
राजाजी टाइगर रिजर्व में स्थित ऐतिहासिक और रमणीय स्थल चौरासी कुटी (बीटल्स आश्रम) के जीर्णोद्धार को भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने स्वीकृति दे दी है। यहां पुरानी संरचनाओं को उनके मूल स्वरूप में संवारा जाएगा और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन कार्यों की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है, जबकि नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ वन अधिकारी और राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक माह में दो बार स्थलीय निरीक्षण करेंगे।
मनसा देवी मंदिर मार्ग के पुनर्निर्माण को भी हरी झंडी
धर्मनगरी हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर के मार्ग पर भूस्खलन से हुई क्षति के पुनर्निर्माण को भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। इससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों में सुधार होगा।
वन्यजीव प्रबंधन में भी कई अहम उपलब्धियां
राज्य में वन्यजीव प्रबंधन को लेकर भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। जुलाई से दिसंबर के बीच वन भूमि हस्तांतरण के 56 प्रस्तावों के वन्यजीव प्रबंधन प्लान स्वीकृत किए गए, जबकि 29 प्रस्तावों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। वन्यजीव हमले में मृत्यु पर मुआवजा राशि को छह लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा मानव–वन्यजीव संघर्ष की त्वरित रोकथाम के लिए 32 वन प्रभागों में 93 क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) गठित की गई हैं। पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर के लिए स्थल चयन भी किया गया है। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में मिनी ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर और गंगोत्री नेशनल पार्क की नेलांग घाटी में नए व्यू प्वाइंट के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।
निष्कर्ष
ऋषिकेश–नीलकंठ महादेव रोपवे परियोजना को मिली मंजूरी उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इससे जहां श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम होगी, वहीं पर्यटन, स्थानीय रोजगार और यातायात व्यवस्था को भी नया बल मिलेगा। साथ ही चौरासी कुटी और मनसा देवी मार्ग के पुनर्निर्माण से प्रदेश के धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।


