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उत्तराखंड में सर्दी का सितम: चकराता में तापमान माइनस में, रातों में जम रहा पानी

चकराता (देहरादून) | 8 जनवरी 2026

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में सर्दी ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है। जौनसार-बावर क्षेत्र के चकराता और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान लगातार शून्य से नीचे बना हुआ है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। रात के समय पानी जमकर बर्फ में तब्दील हो रहा है, जिसके चलते पेयजल आपूर्ति भी बाधित होने लगी है।


रात में माइनस तापमान, सुबह पानी का संकट

चकराता क्षेत्र में रात का तापमान माइनस में पहुंचने से पेयजल लाइनों में पानी जम जा रहा है। कई गांवों में सुबह के समय नलों में पानी नहीं आ पा रहा, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जाड़ी गांव में इसका असर साफ नजर आया, जहां पेयजल लाइन में बहता पानी रातभर में पूरी तरह जम गया।


सूखी ठंड से बढ़ी परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस बार सूखी ठंड ज्यादा परेशान कर रही है। न तो बारिश हो रही है और न ही बर्फबारी, जिससे ठंड का असर और तीखा महसूस हो रहा है। ठंडी हवाओं और पाले के कारण दैनिक जीवन के कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं।


ग्रामीणों की चिंता—पानी और फसल दोनों पर असर

जाड़ी गांव के निवासी जयपाल सिंह, रघुवीर सिंह, सुल्तान सिंह, मेजर सिंह, बलबीर सिंह, नरेंद्र सिंह, मेहर सिंह और केसर सिंह का कहना है कि यदि समय पर बारिश या बर्फबारी होती, तो सूखी ठंड से राहत मिल सकती थी।
बर्फबारी से जहां तापमान संतुलित रहता, वहीं पेयजल स्रोतों के रिचार्ज होने की भी उम्मीद बनती।


पशुपालक और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

कड़ाके की ठंड का सबसे अधिक असर पशुपालकों और किसानों पर पड़ रहा है। बर्फीली रातों और पाले के कारण चारा-पत्ती जुटाना मुश्किल हो गया है। खेतों और बागवानी फसलों पर भी ठंड का प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।


बर्फबारी की आस लगाए बैठे लोग

चकराता और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लोग अब बारिश या बर्फबारी की राह देख रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि बर्फ पड़ने से न केवल ठंड की तीव्रता में कमी आएगी, बल्कि लंबे समय में जल संकट से भी राहत मिलेगी।


निष्कर्ष

चकराता सहित जौनसार-बावर क्षेत्र में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने यह साफ कर दिया है कि माइनस तापमान और सूखी ठंड आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा देती है। जब तक बारिश या बर्फबारी नहीं होती, तब तक पानी, खेती और पशुपालन से जुड़े संकट बने रहने की आशंका है। ऐसे में पहाड़ों में सर्दी का यह दौर आने वाले दिनों में और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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