देहरादून/दिल्ली | 8 जनवरी 2026
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मामले से जुड़ा एक और ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक व्यक्ति महिला पर किसी “बड़े नेता” का नाम न लेने को लेकर धोखेबाजी का आरोप लगाता सुनाई दे रहा है। इस नए ऑडियो ने एक बार फिर सियासी और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है।
वायरल ऑडियो में क्या है दावा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस ऑडियो में एक व्यक्ति महिला से यह कहते हुए सुना जा रहा है कि उसने तीन लोगों में से किसी एक के कहने पर कथित बड़े नेता का नाम नहीं लिया। व्यक्ति महिला को “धोखेबाज” बताते हुए यह भी कहता है कि पहले वायदा हुआ था कि नेता का नाम सामने लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
(नोट: इस वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि अमर उजाला नहीं करता है।)
महिला का पलटवार—‘तुम मुझे फंसाना चाहते थे’
ऑडियो में महिला भी व्यक्ति के आरोपों का जवाब देती सुनाई दे रही है। वह एक बड़े नेता का नाम लेते हुए कहती है कि सामने वाला व्यक्ति उसे “बर्बाद” करना चाहता था। महिला का आरोप है कि उस पर दबाव बनाकर उसे आरोपी बनाया जाता, फिर ब्लैकमेलिंग और मानहानि के मामलों में फंसाकर जेल भेजने की साजिश रची जा रही थी।
मीडिया पर भी अभद्र टिप्पणी का आरोप
बातचीत के दौरान महिला यह भी कहती है कि मीडिया ने जो सवाल पूछे, उसी का जवाब दिया गया। इस पर संबंधित व्यक्ति मीडिया को लेकर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करता हुआ भी ऑडियो में सुना जा रहा है। यही हिस्सा अब सोशल मीडिया पर तीखी बहस का विषय बना हुआ है।
भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत
इसी बीच, अंकिता भंडारी हत्याकांड में अपना नाम उछाले जाने को लेकर भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दुष्यंत गौतम ने अपने खिलाफ कथित आरोपों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को मानहानिकारक माना। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने अपने अंतरिम आदेश में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स को निर्देश दिए कि वे दुष्यंत गौतम से जुड़े सभी आपत्तिजनक कंटेंट को तत्काल हटाएं।
‘वीआईपी’ बताकर टारगेट करने पर रोक
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक दल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भाजपा के राष्ट्रीय सचिव दुष्यंत गौतम को कथित ‘वीआईपी’ बताकर अंकिता हत्याकांड से जोड़ते हुए कोई पोस्ट या वीडियो साझा नहीं करेगा।
दुष्यंत गौतम का पक्ष
दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि यह उनकी छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश है। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर बिना किसी ठोस सबूत के उनका नाम उछाला गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
अदालत की टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही जानकारी प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती है और इससे संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। इसी आधार पर अदालत ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए।
निष्कर्ष
अंकिता भंडारी हत्याकांड में सामने आ रहे नए-नए ऑडियो और आरोपों ने मामले को और जटिल बना दिया है। जहां एक ओर वायरल ऑडियो सियासी साजिश और दबाव की ओर इशारा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश यह स्पष्ट करता है कि बिना सबूत किसी का नाम उछालना कानूनन गंभीर अपराध हो सकता है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत के आगे के रुख पर टिकी हुई हैं, ताकि सच सामने आ सके और अंकिता को न्याय मिल सके।


