ऋषिकेश | उत्तराखंड
दिनांक: 09 जनवरी 2026
एम्स ऋषिकेश ने एक बार फिर उन्नत चिकित्सा क्षमताओं का परिचय देते हुए हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के डॉक्टरों ने 65 वर्षीय जगत वीर सिंह के हृदय वाल्व में गंभीर लीकेज का बिना ओपन हार्ट सर्जरी सफल इलाज कर उन्हें नया जीवन दिया है। इलाज के समय मरीज के दिल की पंपिंग क्षमता केवल 20 प्रतिशत रह गई थी, जिससे स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी।
ओपन हार्ट सर्जरी संभव नहीं थी, बनी थी बड़ी चुनौती
जगत वीर सिंह, तहसील रुड़की के मोहनपुर जट गांव के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उनके हृदय में स्टेंट डाले गए थे। बीते कुछ महीनों से उन्हें सांस फूलने, थकान और चलने-फिरने में भारी दिक्कत होने लगी थी।
हरिद्वार के विभिन्न अस्पतालों में जांच के बाद उनके माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज की पुष्टि हुई और तत्काल सर्जरी की सलाह दी गई। हालांकि, अधिक उम्र और पूर्व में हृदय संबंधी उपचार के चलते ओपन हार्ट सर्जरी अत्यधिक जोखिम भरी मानी जा रही थी।
अत्याधुनिक तकनीक से बिना सर्जरी हुआ इलाज
ऐसी जटिल स्थिति में एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (TEER) तकनीक अपनाई।
इस इंटरवेंशनल प्रक्रिया के जरिए बिना छाती खोले हृदय वाल्व की लीकेज को सफलतापूर्वक ठीक किया गया। इलाज के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें तीन दिन पहले अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
केवल 20 प्रतिशत रह गई थी हृदय की क्षमता
एम्स के कार्डियोलाजिस्ट एडिशनल प्रोफेसर डॉ. बरुण कुमार ने बताया कि मरीज को सीवियर माइट्रल रिगर्जिटेशन की समस्या थी और हृदय की पंपिंग क्षमता महज 20 प्रतिशत रह गई थी, जबकि सामान्य स्थिति में यह करीब 60 प्रतिशत होती है।
उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह बिना सर्जरी की जाती है और उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रही है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने वाली टीम में
प्रो. डॉ. बरुण कुमार,
कार्डियोलाजिस्ट डॉ. सुवेन कुमार,
वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी,
और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार शामिल रहे।
टीमवर्क और तकनीकी दक्षता के चलते यह उपचार पूरी तरह सफल रहा।
क्या है टीईईआर तकनीक?
ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (TEER) तकनीक में जांघ की रक्त नली के माध्यम से एक विशेष क्लिप हृदय तक पहुंचाई जाती है।
यह क्लिप माइट्रल वाल्व के लीकेज वाले हिस्सों को आपस में जोड़ देती है, जिससे रक्त का उल्टा प्रवाह काफी हद तक रुक जाता है।
इससे हृदय की कार्यक्षमता में सुधार होता है और मरीज को सांस फूलने, थकान और दैनिक गतिविधियों में परेशानी से राहत मिलती है।
एम्स की उपलब्धियों पर कार्यकारी निदेशक का बयान
एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान में मौजूद विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक हृदय रोग उपचार सुविधाओं को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि अब जटिल हृदय रोगों का इलाज भी ओपन हार्ट सर्जरी के बिना संभव हो पा रहा है, जो मरीजों के लिए बड़ी राहत है।
निष्कर्ष
एम्स ऋषिकेश में हुआ यह सफल इलाज न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति का उदाहरण है, बल्कि उन मरीजों के लिए भी आशा की किरण है, जिनके लिए सर्जरी संभव नहीं होती।
टीईईआर जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अब गंभीर हृदय रोगों का सुरक्षित और प्रभावी उपचार संभव हो रहा है। यह उपलब्धि एम्स ऋषिकेश को देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों की पंक्ति में और मजबूत करती है।


