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उत्तराखंड में वन्यजीव आतंक पर कार्रवाई: पौड़ी गढ़वाल में खूंखार गुलदार ढेर, नैनीताल में महिला को मारने वाला बाघ पकड़ा गया

पौड़ी गढ़वाल/नैनीताल | 10 जनवरी 2026

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से लोगों के लिए खतरा बने वन्यजीवों के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पौड़ी गढ़वाल के नागदेव क्षेत्र में महीनों से आतंक मचा रहे गुलदार को गुरुवार रात वन विभाग के संयुक्त दल ने ढेर कर दिया। वहीं, नैनीताल के रामनगर में कार्बेट टाइगर रिजर्व के जंगल में महिला की जान लेने वाले बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया गया है। इन दोनों घटनाओं से प्रभावित इलाकों के लोगों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है।


पौड़ी जनपद के नागदेव क्षेत्र में यह गुलदार लंबे समय से ग्रामीणों के लिए भय का कारण बना हुआ था। नवंबर माह में इसी गुलदार ने एक महिला पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसके बाद से स्थानीय लोग खेतों और जंगल की ओर जाने से डरने लगे थे। गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने व्यापक स्तर पर अभियान चलाया।


प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने बताया कि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पांच पिंजरे, 15 ट्रैप कैमरे और चार लाइव सोलर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। बावजूद इसके गुलदार लंबे समय तक पकड़ से बाहर रहा। अंततः संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए लगभग 10 वर्ष आयु के नर गुलदार को मार गिराया। इसके बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल कम हुआ है।


दूसरी ओर, नैनीताल जनपद के रामनगर क्षेत्र में कार्बेट टाइगर रिजर्व के जंगल में लकड़ी लेने गई एक महिला को छह दिन पहले बाघ ने हमला कर मार डाला था। इस घटना के बाद वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए विशेष टीम तैनात की। गुरुवार देर रात बाघ को ट्रेंकुलाइज गन से बेहोश कर सुरक्षित रूप से पकड़ लिया गया। फिलहाल बाघ को ढेला रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है, जहां उसकी निगरानी की जा रही है।


वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत के मात्र आठ दिनों में बाघ और गुलदार के हमलों में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, वर्ष 2025 में वन्यजीवों के हमलों में 68 लोगों की जान गई थी और 487 लोग घायल हुए थे। ये आंकड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करते हैं।


निष्कर्ष

पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल में हुई ताजा कार्रवाइयों से स्थानीय लोगों को तात्कालिक राहत जरूर मिली है, लेकिन बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती अब भी गंभीर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण आबादी की सुरक्षा के लिए स्थायी और प्रभावी रणनीति अपनाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

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