देहरादून | 18 जनवरी 2026
राजधानी देहरादून के पटेलनगर थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां कुछ बदमाशों ने युवकों के एक समूह के साथ न केवल सड़क पर मारपीट की, बल्कि अस्पताल में उपचार के बाद थाने जाते समय उन्हें दोबारा निशाना बनाया। हमलावरों ने पीड़ितों की कार में तोड़फोड़ की और मेडिकल से जुड़े दस्तावेज भी फाड़ डाले।
कारगी चौक पर शुरू हुआ विवाद
देहराखास निवासी मुस्तफा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 15 जनवरी को उनके साथी शहजाद, अब्दुल्ला, दिलशाद और सलमान कारगी चौक से देहराखास की ओर जा रहे थे। इसी दौरान आढ़त बाजार के पास एक काले रंग की एसयूवी ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।
विरोध पर लाठी-डंडों से हमला
टक्कर का विरोध करने पर कार सवार जावेद, जाबिर, परवेज, आसिफ बावा और विष्णु ने युवकों पर हमला कर दिया। आरोप है कि सभी हमलावर आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस मारपीट में युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
अस्पताल से लौटते वक्त दोबारा घेराबंदी
पीड़ितों ने बताया कि प्राथमिक उपचार और मेडिकल कराने के बाद जब वे थाने में शिकायत दर्ज कराने जा रहे थे, तभी एक भूसा स्टोर के पास तीन गाड़ियों में सवार बदमाशों ने उनकी कार को जबरन रोक लिया। इसके बाद आरोपियों ने एक बार फिर युवकों की बेरहमी से पिटाई की।
कार में तोड़फोड़, मेडिकल कागजात फाड़े
हमलावरों ने मारपीट के साथ-साथ पीड़ितों की कार में जमकर तोड़फोड़ की और उनके मेडिकल से जुड़े दस्तावेज भी फाड़ डाले, जिससे वे कानूनी कार्रवाई से पीछे हट जाएं।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, CCTV खंगाले जा रहे
पटेलनगर थाना प्रभारी चंद्रभान अधिकारी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर बृहस्पतिवार को एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल और आसपास के मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
दिनदहाड़े सड़क पर मारपीट और फिर अस्पताल से लौटते समय दोबारा हमला होना शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों का आपराधिक इतिहास होने के बावजूद वे खुलेआम दबंगई दिखा रहे हैं।
निष्कर्ष
देहरादून में हुई यह घटना बताती है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन पीड़ितों को न्याय तभी मिलेगा जब आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ही कानून का भरोसा बहाल कर सकती है।


