BREAKING

देहरादून में मानवता शर्मसार: गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़कर फरार हुआ पति, प्रेम विवाह के बाद सामने आया विवाद

 

देहरादून | दिनांक: 19 जनवरी 2026

राजधानी देहरादून के वसंत विहार क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां प्रेम विवाह के बाद एक युवक अपनी गर्भवती पत्नी को किराये के मकान में अकेला छोड़कर फरार हो गया। महिला छह महीने से अधिक गर्भवती है और पति के चले जाने के बाद उसके सामने जीवनयापन और भोजन तक की गंभीर समस्या खड़ी हो गई।


2024 में हुआ था प्रेम विवाह

पीड़िता तनुजा, निवासी शास्त्रीनगर सीमाद्वार, ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उसकी शादी सितंबर 2024 में मोहम्मद शैफ से प्रेम विवाह के रूप में हुई थी। मोहम्मद शैफ मूल रूप से खटीमा, जिला ऊधम सिंह नगर का निवासी है। शादी के बाद दोनों करीब तीन माह तक खटीमा में पति की मां के साथ रहे।


देहरादून में किराये के मकान में रहने लगे थे दोनों

तनुजा के अनुसार, इसके बाद वह अपने पति के साथ देहरादून आ गई और वसंत विहार क्षेत्र में किराये के मकान में रहने लगी। इसी दौरान वह गर्भवती हुई और वर्तमान में उसकी गर्भावस्था 6 माह 23 दिन की है। महिला ने बताया कि गर्भावस्था के इस नाजुक समय में उसे पति और ससुराल पक्ष के सहयोग की सख्त जरूरत थी।


सास के आने के बाद बदला माहौल

पीड़िता का आरोप है कि 10 जून 2025 को उसकी सास देहरादून आई और घर में विवाद व झगड़ा किया। इसके बाद वह अपने बेटे मोहम्मद शैफ को साथ लेकर खटीमा चली गई। उसी दिन से उसका पति वापस नहीं लौटा और उसे अकेले ही किराये के मकान में छोड़ दिया गया।


खाने-पीने तक को तरसी महिला

पति के फरार होने के बाद महिला के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। गर्भावस्था के कारण काम करने में असमर्थ होने से उसे खाने-पीने तक की समस्या होने लगी। मजबूरी में उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून और महिला हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।


पति और सास के खिलाफ मुकदमा दर्ज

महिला हेल्पलाइन की प्रारंभिक जांच के बाद मामला वसंत विहार थाना पुलिस को स्थानांतरित किया गया। थानाध्यक्ष अशोक राठौर ने बताया कि जांच के आधार पर पीड़िता के पति मोहम्मद शैफ और उसकी मां के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना जारी है और आरोपितों की भूमिका की जांच की जा रही है।


निष्कर्ष

गर्भावस्था जैसे संवेदनशील दौर में महिला को अकेला छोड़ देना न केवल सामाजिक और नैतिक रूप से निंदनीय है, बल्कि कानूनन भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। देहरादून का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि प्रेम विवाह के बाद भी महिलाओं की सुरक्षा और अधिकार कितने असुरक्षित हैं। अब पीड़िता को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी प्रशासन और कानून व्यवस्था पर टिकी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *