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दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर सख्ती: आरोपी छात्र हॉस्टल से निष्कासित, एनएमसी तक पहुंचा मामला

देहरादून | 22 जनवरी 2026

दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के मामलों ने एक बार फिर शैक्षणिक परिसरों में छात्र सुरक्षा और अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉलेज प्रशासन ने रैगिंग के आरोप में 2023 बैच के छात्र गौरव पोखरियाल को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई प्राचार्य डॉ. गीता जैन के निर्देश पर की गई।


जानकारी के अनुसार, बैच 2025 के जूनियर छात्रों ने आरोपी छात्र पर अनुचित व्यवहार और मानसिक दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। छात्रों ने इस संबंध में सीधे नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी थी। शिकायत मिलने के बाद कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और आरोपी छात्र को तत्काल हॉस्टल से बाहर कर दिया गया।


यह मामला 12 जनवरी का बताया जा रहा है। इसी दिन कॉलेज में रैगिंग की एक और गंभीर घटना सामने आई थी, जिसमें एक छात्र की बेल्ट और चप्पलों से पिटाई किए जाने का आरोप लगा था। इस प्रकरण में 2023 और 2024 बैच के कुल नौ छात्रों के खिलाफ हॉस्टल और कक्षाओं से निष्कासन के साथ-साथ जुर्माने की कार्रवाई की गई थी।


एक ही दिन में दो रैगिंग की घटनाएं सामने आने से कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन को लेकर माहौल गरमा गया है। छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल है, वहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि कॉलेज प्रशासन रैगिंग को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतेगा। उन्होंने कहा कि हॉस्टल की निगरानी बढ़ाई जाएगी और एंटी-रैगिंग कमेटी को और अधिक सक्रिय किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


हालांकि, इन घटनाओं को लेकर यह भी आरोप लग रहे हैं कि शुरुआती दिनों में कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बताया जा रहा है कि 12 जनवरी की घटनाओं के बावजूद कुछ छात्र दस दिन बाद भी ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे। प्रशासनिक स्तर पर हलचल तब तेज हुई, जब मामला मीडिया की सुर्खियों में आया और एनएमसी ने रिपोर्ट तलब की।


विशेषज्ञों और अभिभावकों का मानना है कि रैगिंग जैसे संवेदनशील मामलों में देरी छात्रों के मन में भय और अविश्वास पैदा करती है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि छात्रों को अपनी शिकायत सीधे कॉलेज प्रशासन के बजाय एनएमसी तक पहुंचानी पड़ी, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


निष्कर्ष:
दून मेडिकल कॉलेज में सामने आए रैगिंग के मामले यह स्पष्ट करते हैं कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और सुरक्षा को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की सख्त जरूरत है। प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन समयबद्ध और पारदर्शी निर्णय ही छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल कर सकते हैं। आने वाले दिनों में एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट और उस पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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