BREAKING

ऋषिकेश में अमित शाह का संदेश: सनातन की रक्षा शोर से नहीं, शास्त्रों से होती है

ऋषिकेश (उत्तराखंड) | 22 जनवरी 2026

ऋषिकेश के गीता भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गीता प्रेस की प्रतिष्ठित पत्रिका कल्याण के शताब्दी अंक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा शोरगुल, प्रदर्शन या आक्रामकता से नहीं, बल्कि शास्त्रों और विचारों की शक्ति से ही संभव है। उन्होंने गीता प्रेस को भारत की सांस्कृतिक चेतना का मजबूत स्तंभ बताया।


गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जो भारत को सही मायनों में जानते हैं, वे गीता प्रेस के योगदान को भी भली-भांति समझते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गीता प्रेस कभी मुनाफे के उद्देश्य से नहीं चला, बल्कि पीढ़ियों के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ा। यही कारण है कि यह संस्था सौ वर्षों बाद भी अपनी मूल आत्मा और मूल्यों को संजोए हुए है।


अमित शाह ने कहा कि जब एक दौर में धर्म को अंधविश्वास कहना फैशन बन गया था, तब गीता प्रेस ने बिना किसी आक्रामक भाषा या शोर-शराबे के अपने विचारों को शालीनता से समाज के सामने रखा। उन्होंने निजी स्मृतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी दादी गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित गीता पढ़ती थीं और आज उनकी पोती गीता प्रेस की हनुमान चालीसा अपने पास रखती है। यह गीता प्रेस की पीढ़ी-दर-पीढ़ी निरंतरता और विश्वास का प्रमाण है।


उन्होंने गीता प्रेस के संस्थापकों जयदयाल गोयंदका और हनुमान प्रसाद पोद्दार के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि कल्याण पत्रिका को विज्ञापन से मुक्त रखने की सलाह स्वयं गांधी जी ने दी थी, ताकि आध्यात्मिक साहित्य बाजार के दबावों से दूर रह सके। आज भी यह पत्रिका बिना विज्ञापन के प्रकाशित हो रही है, जो इसकी विशिष्ट पहचान है।


गृह मंत्री ने युवाओं की बढ़ती भागीदारी को देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म के प्रति युवाओं का आकर्षण और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। कुंभ जैसे आयोजनों और धार्मिक पर्वों में युवाओं की बढ़ती सहभागिता यह दर्शाती है कि भारत एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है।


अपने संबोधन में अमित शाह ने राष्ट्रीय महत्व के विषयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया, केदारनाथ-बदरीनाथ धाम सहित देश के 35 से अधिक तीर्थस्थलों में विकास कार्य हो रहे हैं, अंग्रेजों के समय विदेश ले जाई गई 642 से अधिक मूर्तियों को वापस लाकर पुनः स्थापित किया गया है और अब मातृभाषा में शिक्षा का विरोध नहीं होता।


इस अवसर पर कई संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, राजेंद्र दास महाराज, गोविंदानंद तीर्थ महाराज, ज्ञानानंद महाराज, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, डॉ. धन सिंह रावत, यमकेश्वर विधायक रेनू बिष्ट, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।


निष्कर्ष:
ऋषिकेश में गीता प्रेस के शताब्दी समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सनातन धर्म की शक्ति उसकी शास्त्रीय परंपरा, विचारशीलता और संयम में निहित है। अमित शाह का संबोधन न केवल गीता प्रेस के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक चेतना और मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा भी देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *