देहरादून | 24 जनवरी 2026
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज के बीच हिमस्खलन (एवलांच) का खतरा बढ़ गया है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी दर्ज की जा रही है, जिसके चलते उच्च हिमालयी इलाकों में खतरे की चेतावनी जारी की गई है। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर के अनुसार, 24 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ का असर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगा, लेकिन इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि तापमान में गिरावट और ताजा बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जोखिम बढ़ सकता है।
रक्षा भू- सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) द्वारा जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, शुक्रवार शाम पांच बजे से शनिवार शाम पांच बजे तक के लिए उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों को डेंजर लेवल-3, जबकि बागेश्वर जिले को डेंजर लेवल-2 श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी की स्थिति में हिमस्खलन की आशंका जताई गई है।
डीजीआरई की चेतावनी के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने संबंधित जिलों के जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और अन्य रेखीय विभागों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं। संवेदनशील इलाकों में निरंतर निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने को कहा गया है।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और चेतावनियों का सख्ती से पालन करना सभी के हित में है, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
हिमस्खलन से बचाव के लिए जरूरी सुझाव
• बर्फबारी या हिमस्खलन की चेतावनी के दौरान उच्च हिमालयी और बर्फीले क्षेत्रों में केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करें।
• पुराने एवलांच प्रभावित क्षेत्रों और तीव्र ढलानों से दूरी बनाए रखें।
• पूर्व में हिमस्खलन की घटनाओं वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतें और वहां रुकने या शिविर लगाने से बचें।
• यदि किसी कारणवश अधिक बर्फबारी वाले क्षेत्र में फंसे हों, तो एक-दो दिन के लिए निचले और अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों में स्थानांतरित हो जाएं।
• मोबाइल फोन, पावर बैंक, टॉर्च, प्राथमिक उपचार किट और जरूरी दवाइयां अपने पास रखें।
• जिला प्रशासन द्वारा जारी किसी भी एडवाइजरी, अलर्ट या प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करें।
निष्कर्ष:
पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन का खतरा गंभीर बना हुआ है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन नागरिकों और यात्रियों की सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। समय रहते सतर्कता और दिशा-निर्देशों का पालन कर किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सकता है।


