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शकील अहमद के बयान पर घमासान: हरीश रावत का तीखा पलटवार, बोले—‘ढेर से बाहर निकले सड़े आलू का कोई महत्व नहीं’

देहरादून, 28 जनवरी 2026

कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में शकील अहमद की टिप्पणी के बाद सियासी विवाद और गहरा गया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पूर्व कांग्रेस नेता शकील अहमद के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने शकील अहमद को “सड़ा आलू” बताते हुए कहा कि जो ढेर से बाहर निकल जाता है, उसका फिर कोई महत्व नहीं रहता।


हरीश रावत ने कहा कि शकील अहमद अब कांग्रेस का हिस्सा नहीं हैं और ऐसे लोगों की टिप्पणियों का पार्टी या नेतृत्व पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी को लेकर इस तरह की बयानबाजी केवल सुर्खियां बटोरने का प्रयास है।


गौरतलब है कि शकील अहमद ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए उन्हें डरपोक और असुरक्षित नेता बताया था। उन्होंने दावा किया था कि राहुल गांधी पार्टी में केवल उन्हीं युवा नेताओं को आगे बढ़ाते हैं जो उनकी प्रशंसा करते हैं और चापलूसी में लगे रहते हैं। साथ ही कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र के अभाव का भी आरोप लगाया था।


शकील अहमद के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास जनता को बताने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है। इसी वजह से वह ऐसे बयानों और विवादों को हवा देकर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।


यूसीसी के मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विवाह सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण संस्कार है। उन्होंने आरोप लगाया कि समान नागरिक संहिता के तहत विवाह को केवल पंजीकरण की प्रक्रिया तक सीमित कर दिया गया है, जिससे पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था पर असर पड़ा है। रावत ने इसे सनातन धर्म के खिलाफ उठाया गया कदम बताया।


उन्होंने कहा कि यूसीसी के नाम पर सामाजिक और धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप किया जा रहा है, जबकि भाजपा सरकार बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।


निष्कर्ष:
शकील अहमद की टिप्पणी ने जहां कांग्रेस के भीतर बयानबाजी को तेज कर दिया है, वहीं हरीश रावत के तीखे शब्दों से यह साफ हो गया है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर यूसीसी और सनातन धर्म को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने उत्तराखंड की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।

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