देहरादून। | दिनांक: 29 जनवरी 2026
उत्तराखंड सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने और भूमि के दुरुपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से अहम निर्णय लिया है। कैबिनेट बैठक में प्राग फार्म औद्योगिक क्षेत्र में भूमि आवंटन से जुड़े नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। अब उद्योग लगाने के लिए आवंटित भूमि का तीन वर्ष तक उपयोग नहीं होने पर उसका आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा।
सरकारी निर्णय के अनुसार, औद्योगिक विकास के लिए आवंटित भूमि का उपयोग आवंटन की तिथि से तीन साल की अवधि के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में भूमि पर कोई औद्योगिक गतिविधि शुरू नहीं की जाती है, तो संबंधित पट्टेदार का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जमीन रोककर रखने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी और वास्तविक निवेशकों को अवसर मिलेगा।
हालांकि, कैबिनेट ने उद्योग हित में एक महत्वपूर्ण राहत भी दी है। औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से राजस्व विभाग की सहमति प्राप्त होने पर पट्टेदार को समान औद्योगिक प्रयोजन के लिए भूमि को उप-पट्टे (सब-लीज) पर देने का अधिकार होगा। यह व्यवस्था उन निवेशकों के लिए सहायक होगी, जो तकनीकी या अन्य कारणों से स्वयं परियोजना शुरू नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन भूमि का औद्योगिक उपयोग सुनिश्चित करना चाहते हैं।
उल्लेखनीय है कि ऊधमसिंह नगर जिले के प्राग फार्म की कुल 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए पहले ही सिडकुल को हस्तांतरित किया जा चुका है। पूर्व में जारी आदेशों के तहत पट्टेदार को भूमि बेचने या पट्टे पर देने के अलावा किसी अन्य तरीके से हस्तांतरण का अधिकार नहीं था, लेकिन नए संशोधन के बाद उप-पट्टे की अनुमति दी गई है, वह भी समान उद्देश्य के लिए।
सरकार का कहना है कि इस संशोधन से औद्योगिक परियोजनाओं में तेजी आएगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, खाली पड़ी औद्योगिक भूमि के कारण होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकेगा।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड कैबिनेट का यह निर्णय औद्योगिक अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। तीन साल की समय-सीमा तय होने से निवेशक गंभीरता से परियोजनाएं शुरू करेंगे, जबकि उप-पट्टे की अनुमति से उद्योगों को लचीलापन मिलेगा। आने वाले समय में यह फैसला राज्य के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार दे सकता है।


