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मसूरी में बाबा बुल्लेशाह मजार विवाद ने फिर पकड़ा तूल, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ी सियासी-धार्मिक हलचल

मसूरी | 30 जनवरी 2026

उत्तराखंड के पर्यटन नगरी मसूरी में स्थित बाबा बुल्लेशाह मजार को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। इंटरनेट मीडिया पर दो अलग-अलग वीडियो वायरल होने के बाद मामला दोबारा चर्चा के केंद्र में आ गया है। इन वीडियो में धार्मिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के बयान सामने आने से क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बनता नजर आ रहा है।


वायरल वीडियो में क्या कहा गया

सोशल मीडिया पर प्रसारित पहले वीडियो में देवभूमि काली सेना के प्रदेश महामंत्री अजय कप्तान यह कहते नजर आ रहे हैं कि बालाहिसार क्षेत्र में स्थित बाबा बुल्लेशाह मजार के हालिया ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी हिंदू रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने ली है। वीडियो में अजय कप्तान ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग मजार के पुनर्निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे हैं।

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मजार की दोबारा लीपापोती या पुनर्निर्माण न कराया जाए, अन्यथा हिंदू संगठन इसे फिर से ध्वस्त कर देंगे।


दूसरे वीडियो में मंदिर निर्माण की चेतावनी

दूसरे वायरल वीडियो में देवभूमि काली सेना के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश जोशी यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि यदि मजार का पुनर्निर्माण किया गया, तो उसी स्थान पर हनुमान जी का मंदिर भी बनाया जाएगा। इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है।


मजार समिति ने झाड़ा पल्ला

इस पूरे प्रकरण पर बाबा बुल्लेशाह मजार समिति के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वे अजय कप्तान और भूपेश जोशी दोनों को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि समिति का इन बयानों से कोई लेना-देना नहीं है।


कौन थे बाबा बुल्लेशाह?

इतिहासकारों और सूफी साहित्य के जानकारों के अनुसार, बाबा बुल्लेशाह 17वीं–18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध सूफी कवि थे। बताया जाता है कि वे पाकिस्तान के कसूर शहर के निवासी थे और उनके गुरु शाह इनायत कादिरी थे। सूफी परंपरा में उनका विशेष स्थान माना जाता है।


तोड़फोड़ के मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं

गौरतलब है कि 24 जनवरी 2026 को निजी भूमि पर स्थित इस मजार में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने अब तक किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की है, न ही किसी को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकरण में दर्ज एफआईआर में जिन धाराओं का उल्लेख है, उनके तहत गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है, इसलिए जांच प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है।


निष्कर्ष

मसूरी में बाबा बुल्लेशाह मजार को लेकर उठता विवाद केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सोशल मीडिया, संगठनों के बयानों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बनता जा रहा है। ऐसे में प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे वाली गतिविधियों पर सख्त नजर रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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