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ईरान-इजरायल युद्ध का असर: विकासनगर में बढ़ी चिंता, ईरान में फंसे परिजनों से संपर्क टूटने से परिवार परेशान

देहरादून/विकासनगर, 5 मार्च 2026

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और इजरायल के बीच युद्ध का असर अब भारत के परिवारों तक भी पहुंचने लगा है। उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र में कई परिवार ऐसे हैं जिनके अपने लोग ईरान में रह रहे हैं। बीते कुछ दिनों से उनसे संपर्क न हो पाने के कारण परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।


युद्ध का दायरा बढ़ा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता

अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए जा रहे हमलों का यह छठा दिन है। इस दौरान ईरान के करीब 33 नागरिक और सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए गए हैं। वहीं, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी संकट खड़ा कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।


विकासनगर के अंबाड़ी गांव में बढ़ी चिंता

विकासनगर ब्लॉक के अंबाड़ी गांव निवासी अयूब खान के भतीजे अली हैदर और उनकी पत्नी इन दिनों ईरान के कुम शहर में रह रहे हैं। दोनों कुम स्थित इस्लामिक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं। कुम शहर ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

अयूब खान ने बताया कि तीन दिन पहले उनकी भतीजे से फोन पर बात हुई थी। उस दौरान अली हैदर ने बताया था कि वे भारतीय दूतावास से मिलने वाली सूचनाओं का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल सेवाएं बंद होने के कारण संपर्क बनाए रखने में दिक्कत आ रही है।


बेटी से हुई थी आखिरी बार बात, फिर कट गया कॉल

विकासनगर क्षेत्र के ही निवासी जाकिर हुसैन की विवाहित बेटी भी ईरान में रहती है और वह वहां की नागरिक है। जाकिर हुसैन ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी बेटी से फोन पर बात हुई थी।

उन्होंने बताया कि बेटी ने उन्हें चिंता न करने को कहा और बताया कि वह और उसका परिवार पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि बातचीत के कुछ ही देर बाद फोन कॉल अचानक कट गई और तब से उसका फोन बंद आ रहा है। इसके बाद से परिवार लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।


परिजनों की बढ़ती बेचैनी, सरकार से उम्मीद

क्षेत्र के परिवारों का कहना है कि युद्ध की खबरों के बीच संपर्क टूटने से चिंता और भी बढ़ गई है। वे लगातार टीवी और इंटरनेट के माध्यम से हालात की जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं।

परिजनों को उम्मीद है कि भारत सरकार और भारतीय दूतावास जल्द ही वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उनसे संपर्क स्थापित कराने में मदद करेंगे, ताकि उनके परिवारों की चिंता कुछ कम हो सके।

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