उत्तरकाशी, 5 मार्च 2026
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जंगलों में लगी आग अब लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। बाड़ाहाट रेंज के तहत गणेशपुर क्षेत्र के जंगलों में धधक रही आग के कारण गंगोत्री हाईवे पर पहाड़ियों से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। इसी दौरान हाईवे से गुजर रहा एक बाइक सवार युवक पत्थर की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई।
गंगोत्री हाईवे पर हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, उत्तरकाशी के लाटा गांव निवासी मयंक पंवार (28 वर्ष) पुत्र महेश पंवार अपनी बाइक से उत्तरकाशी से नेताला की ओर जा रहे थे।
गणेशपुर और नेताला के बीच पहाड़ी क्षेत्र में पिछले दो दिनों से जंगलों में आग लगी हुई है। इसी दौरान अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे, जिनमें से एक बड़ा पत्थर मयंक पंवार की बाइक से टकरा गया।
पत्थर की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।
स्थानीय लोगों ने पहुंचाया अस्पताल
हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायल युवक को तुरंत जिला अस्पताल उत्तरकाशी पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने युवक का इलाज शुरू किया, लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पी.एस. पोखरियाल के अनुसार युवक को अंदरूनी तौर पर गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
जंगल की आग से बढ़ा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो दिनों से गणेशपुर क्षेत्र के जंगलों में आग लगी हुई है। आग के कारण पहाड़ियों की मिट्टी और पत्थर ढीले हो गए हैं, जिससे लगातार पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।
इसके अलावा आग की वजह से कई पेड़ भी कमजोर हो गए हैं और उनके गिरने का भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में गंगोत्री हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जंगलों में लगी आग को समय रहते नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द आग पर काबू पाया जाए और हाईवे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
बड़ी आपदा का बन सकता है खतरा
स्थानीय लोगों के मुताबिक जंगलों में लगी आग धीरे-धीरे सड़कों और आवासीय बस्तियों के करीब पहुंच रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह स्थिति बड़े हादसों और आपदा का रूप ले सकती है।
निष्कर्ष
उत्तरकाशी में जंगल की आग केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। मयंक पंवार की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की कितनी जरूरत है।
प्रशासन और वन विभाग के लिए यह घटना चेतावनी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं।


