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देहरादून में झंडे जी मेले की नगर परिक्रमा में उमड़ी आस्था की भीड़, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

दरबार साहिब से निकली भव्य नगर परिक्रमा, मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने किया स्वागत और प्रसाद वितरण

देहरादून | 10 मार्च 2026

राजधानी देहरादून में आयोजित विश्व प्रसिद्ध श्री झंडे जी मेले के दौरान मंगलवार को आस्था और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री झंडे जी के आरोहण के तीसरे दिन दरबार साहिब से भव्य नगर परिक्रमा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। परिक्रमा के दौरान पूरा शहर भक्ति और उत्साह के रंग में सराबोर नजर आया।


सुबह से ही श्री दरबार साहिब परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। संगत ने गुरु महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और इसके बाद श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज की अगुवाई में नगर परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए गुरु महाराज की महिमा का गुणगान करते नजर आए।


नगर परिक्रमा दरबार साहिब से शुरू होकर सहारनपुर चौक, कांवली रोड, एसजीआरआर बिंदाल, तिलक रोड, चकराता रोड, घंटाघर और पलटन बाजार जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए दोबारा दरबार साहिब पहुंचकर सम्पन्न हुई। इस दौरान मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने संगत का स्वागत किया और प्रसाद वितरण किया।


इस अवसर पर श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु की शरण में आने से ही मनुष्य को सच्चे मार्ग का ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि गुरु की वाणी अमृत के समान होती है, जो मानव जीवन को पवित्र और सफल बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि भक्ति, सेवा और सत्कर्म ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं और जो व्यक्ति सच्चे मन से गुरु का स्मरण करता है, उस पर सद्गुरु की असीम कृपा बरसती है।


परिक्रमा के दौरान एसजीआरआर बॉम्बेबाग में श्रद्धालुओं के लिए गन्ने का प्रसाद वितरित किया गया। वहीं, श्री दरबार साहिब परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर में भी श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 200 यूनिट रक्तदान किया गया।


मेला अधिकारी विजय गुलाटी ने बताया कि झंडे जी मेले की नगर परिक्रमा दूनवासियों के लिए एक विशेष और ऐतिहासिक क्षण होता है। इस दौरान देश-विदेश से आई संगत शहर के लोगों के बीच आस्था और भाईचारे का संदेश देती है।


निष्कर्ष:
देहरादून का झंडे जी मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी परिचायक है। नगर परिक्रमा के दौरान उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गुरु महाराज के प्रति लोगों की श्रद्धा और विश्वास आज भी उतना ही अटूट है।

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