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पांवटा साहिब–देहरादून हाईवे परियोजना में बड़ा बदलाव: प्रेमनगर से बल्लूपुर तक 5 किमी हिस्सा अब राष्ट्रीय राजमार्ग नहीं

देहरादून | 12 मार्च 2026

पांवटा साहिब–देहरादून राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस परियोजना के तहत प्रेमनगर से बल्लूपुर चौक तक करीब 5 किलोमीटर लंबा हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। इस हिस्से को ‘डिमोशन’ करते हुए अब राज्य राजमार्ग (स्टेट हाईवे) का दर्जा दिया गया है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद यह हिस्सा अब राष्ट्रीय राजमार्ग सूची में शामिल नहीं रहेगा।


अब लोक निर्माण विभाग संभालेगा जिम्मेदारी

अधिसूचना के बाद प्रेमनगर से बल्लूपुर तक के डिनोटिफाइड हिस्से का नियंत्रण लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रांतीय खंड देहरादून को सौंपा जाएगा।

प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि जल्द ही सड़क के इस हिस्से के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और इसके रखरखाव व संचालन की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के पास होगी।


IMA और FRI क्षेत्र में भूमि हस्तांतरण बनी वजह

अधिकारियों के अनुसार, प्रेमनगर से बल्लूपुर के बीच भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) और वन अनुसंधान संस्थान (FRI) जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान स्थित हैं।

इन क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण और अन्य प्रशासनिक जटिलताओं के कारण चौड़ीकरण योजना को प्रेमनगर तक ही सीमित रखने का निर्णय लिया गया। इसी वजह से आगे का हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग से हटाकर राज्य राजमार्ग में शामिल कर दिया गया।


प्रेमनगर फ्लाईओवर का काम अंतिम चरण में

एनएचएआई देहरादून के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह के अनुसार पांवटा साहिब राजमार्ग का चौड़ीकरण कार्य लगभग 95 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है

केवल प्रेमनगर के पास एक फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जिसे अगले चार दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। फिलहाल सर्विस लेन से जुड़े कुछ छोटे कार्य पूरे करने के लिए फ्लाईओवर से ट्रायल के तौर पर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है

काम पूरा होने के बाद यह राजमार्ग पूरी तरह आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।


35 मिनट में तय होगी एक घंटे से अधिक की दूरी

एनएच-07 के अंतर्गत पांवटा साहिब से प्रेमनगर तक 44.8 किलोमीटर लंबे मार्ग को फोर लेन में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें लगभग 25 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड बाईपास बनाया गया है।

यह बाईपास पांवटा साहिब, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुधोवाला जैसे भीड़भाड़ वाले कस्बों को बाईपास करता है। इससे मार्ग की कुल लंबाई में करीब 7 किलोमीटर की कमी आई है।

इसके चलते अब पांवटा साहिब से देहरादून तक की यात्रा एक घंटे से अधिक समय के बजाय लगभग 35 मिनट में पूरी हो सकेगी


1646 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा हाईवे

चार लेन हाईवे परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) पर दो पैकेजों में विकसित किया जा रहा है। इसकी कुल लागत 1,646.21 करोड़ रुपये है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति और यूटिलिटी शिफ्टिंग भी शामिल है।

पैकेज-1 (पांवटा साहिब–मेदनीपुर | 18.7 किमी)
इस पैकेज की लागत 553.21 करोड़ रुपये है, जिसमें 1,175 मीटर लंबा फोर लेन यमुना पुल भी शामिल है।

पैकेज-2 (मेदनीपुर–बल्लूपुर | 26.1 किमी)
इस हिस्से पर 1,093 करोड़ रुपये की लागत से शहरी बाईपास, अंडरपास और सर्विस रोड विकसित किए गए हैं।

इस परियोजना से उत्तराखंड के 21 और हिमाचल प्रदेश के 4 गांव प्रभावित हुए हैं।


31.5 किलोमीटर हिस्से पर शुरू हो चुका है यातायात

परियोजना के तहत अधिकांश पुल, अंडरपास और अन्य संरचनात्मक कार्य पूरे हो चुके हैं। फिलहाल 31.5 किलोमीटर लंबे हिस्से पर यातायात भी शुरू कर दिया गया है

भीड़भाड़ वाले कस्बों को बाईपास करने से अब यात्रा समय कम होने के साथ ईंधन की खपत भी घटेगी और यातायात अधिक सुगम होगा।


हाईवे की प्रमुख विशेषताएं

नए हाईवे को आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें कई विशेष सुविधाएं शामिल हैं।

  • सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक डिजाइन

  • यमुना और आसन नदी पर अत्याधुनिक फोर लेन पुल

  • थ्री बीम क्रैश बैरियर और एंटी-ग्लेयर स्क्रीन

  • 24×7 निगरानी के लिए पीटीजेड कैमरे

  • आधुनिक साइनएज और रोड मार्किंग

  • पर्यावरण संतुलन के लिए व्यापक पौधारोपण

  • स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट के बाद सभी सिफारिशों को लागू किया गया


पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बड़ा फायदा

इस हाईवे के पूरा होने के बाद देहरादून, हिमाचल और यमुनोत्री धाम के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी

इसके साथ ही पर्यटन, उद्योग, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। यह मार्ग चारधाम यात्रा के पहले धाम यमुनोत्री तक पहुंच को भी अधिक तेज और सुरक्षित बनाएगा।


निष्कर्ष:
पांवटा साहिब–देहरादून फोर लेन परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली अहम परियोजना मानी जा रही है। हालांकि प्रेमनगर से बल्लूपुर तक के हिस्से को राष्ट्रीय राजमार्ग से हटाने का फैसला परियोजना में बड़ा बदलाव है, लेकिन हाईवे का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद क्षेत्र के लोगों को तेज, सुरक्षित और जाममुक्त यात्रा का बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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