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विक्रम शर्मा हत्याकांड में पुलिस का शिकंजा कसता हुआ, फरार आरोपियों पर इनाम दोगुना कर 50 हजार किया

देहरादून, 18 मार्च 2026


देहरादून के चर्चित गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने फरार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे छह आरोपियों पर इनामी राशि बढ़ाकर 25 हजार से 50 हजार रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपियों की तस्वीरें भी सार्वजनिक कर आमजन से सहयोग की अपील की है।


एसएसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पहले प्रत्येक आरोपी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, लेकिन एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। इसी को देखते हुए इनामी राशि को दोगुना करते हुए 50-50 हजार रुपये कर दिया गया है।


पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को भी इन आरोपियों के संबंध में कोई जानकारी मिलती है, तो तुरंत सिटी कंट्रोल रूम देहरादून के नंबर 9411112972 पर संपर्क करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।


गौरतलब है कि 13 फरवरी 2026 की सुबह राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल के बाहर झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर मौके से फरार हो गए थे, जिससे शहर में सनसनी फैल गई थी।


इस मामले में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने अब तक दो आरोपियों—अक्षत ठाकुर और राजकुमार—को गिरफ्तार कर लिया है। अक्षत ठाकुर नोएडा के एक निजी कॉलेज में बीबीए का छात्र है, जबकि राजकुमार फरार आरोपी यशराज का पिता है और साजिश में सक्रिय भूमिका निभा चुका है।


जांच में सामने आया है कि इस सनसनीखेज हत्याकांड की साजिश करीब छह महीने पहले झारखंड के जमशेदपुर जेल के भीतर रची गई थी। योजना के तहत शूटरों को देहरादून बुलाया गया, जहां उन्हें ठहरने, वाहन और अन्य लॉजिस्टिक सहायता स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। वारदात के बाद सभी आरोपी फरार हो गए।


फरार आरोपियों में अंकित वर्मा, आशुतोष कुमार, विशाल सिंह, आकाश कुमार प्रसाद, यशराज और जितेंद्र कुमार साहू शामिल हैं, जो झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी हैं। पुलिस लगातार इनकी तलाश में दबिश दे रही है।


विक्रम शर्मा का आपराधिक इतिहास
विक्रम शर्मा झारखंड का कुख्यात अपराधी था, जिसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी जैसे कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। करीब आठ साल पहले उसे जमशेदपुर पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार किया था।


पुलिस जांच के अनुसार, यह हत्या किसी तात्कालिक विवाद का परिणाम नहीं थी, बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। मुख्य साजिशकर्ता आशुतोष कुमार ने ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़ा, जो विक्रम शर्मा के अत्याचारों से प्रभावित रहे थे।


निष्कर्ष:
विक्रम शर्मा हत्याकांड ने देहरादून में अपराध के नेटवर्क और बाहरी गिरोहों की सक्रियता को उजागर कर दिया है। पुलिस की सख्ती और इनामी राशि बढ़ाने से फरार आरोपियों पर दबाव जरूर बढ़ेगा। अब देखना होगा कि जनता के सहयोग और पुलिस की रणनीति से इस हाई-प्रोफाइल मामले के सभी आरोपी कब तक कानून के शिकंजे में आते हैं।

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