स्थान: देहरादून | दिनांक: 21 मार्च 2026
उत्तराखंड में आबकारी विभाग ने इस बार एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के चार प्रमुख जिलों—देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर—में पहली बार शत-प्रतिशत मदिरा दुकानों का व्यवस्थापन सुनिश्चित किया गया है। बीते एक दशक से इन जिलों में हर साल कई दुकानें खाली रह जाती थीं, लेकिन इस बार विभाग की रणनीति सफल रही है।
आबकारी विभाग के अनुसार, इस वर्ष न केवल चार बड़े जिलों में बल्कि तीन पहाड़ी जिलों—चंपावत, टिहरी और चमोली—में भी सभी मदिरा दुकानों के लिए बोलियां लग चुकी हैं। इस तरह कुल सात जिलों में 100% दुकानों का आवंटन पूरा हो गया है, जो विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
गौरतलब है कि पिछले 10 वर्षों से इन बड़े जिलों में दुकानों के खाली रहने की समस्या बनी हुई थी। इसके पीछे कई कारण थे, जैसे दुकानों के स्थान को लेकर विवाद, स्थानीय आपत्तियां या अन्य प्रशासनिक अड़चनें। इस बार आबकारी विभाग ने पहले से ही इन समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान कर लिया था।
आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने बताया कि सभी जिलों में व्यवस्थापन प्रक्रिया से पहले विस्तृत तैयारी की गई थी। संभावित समस्याओं को समय रहते हल किया गया, जिससे यह परिणाम संभव हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग ने इस बार संचालन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया है।
राजस्व के लिहाज से भी यह कदम अहम माना जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मदिरा दुकानों से 2604 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए यह लक्ष्य बढ़ाकर 2693 करोड़ रुपये रखा गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष का कुल आबकारी राजस्व लक्ष्य 5400 करोड़ रुपये है, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा केवल दुकानों से ही आने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ अन्य जिलों में अभी भी सभी दुकानों का व्यवस्थापन नहीं हो पाया है। इसके लिए आबकारी विभाग ने दोबारा विज्ञप्ति जारी कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, ताकि जल्द ही वहां भी 100% आवंटन सुनिश्चित किया जा सके।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में मदिरा दुकानों के शत-प्रतिशत व्यवस्थापन की यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि राज्य के राजस्व को भी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसी तरह योजनाबद्ध तरीके से काम जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में राजस्व लक्ष्य में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ व्यवस्था और पारदर्शिता में भी सुधार देखने को मिलेगा।


