स्थान: देहरादून, उत्तराखंड | तारीख: 30 अप्रैल 2026
देहरादून में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच पुलिस ने एक अहम खुलासा किया है। हालिया लूट, हत्या, फायरिंग और वाहन चोरी की घटनाओं की जांच में सामने आया है कि बदमाश वारदात के तुरंत बाद शहर से भागने के लिए पांच प्रमुख कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हैं। अब पुलिस ने इन्हीं रास्तों पर फोकस करते हुए नई रणनीति तैयार की है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन कॉरिडोर की खासियत यह है कि शहर से निकलते ही कुछ ही मिनटों में जंगल, हाईवे, बाहरी थाना क्षेत्र या जिला सीमाएं मिल जाती हैं। यही वजह है कि अपराधी तेजी से शहर से बाहर निकलने में सफल हो जाते हैं।
अब हर बड़ी वारदात के बाद पुलिस 15 से 20 मिनट के भीतर इन कॉरिडोर पर नाकेबंदी कर देती है। वायरलेस अलर्ट जारी होते ही संबंधित थानों को सक्रिय कर दिया जाता है, जिससे अपराधियों को शहर से बाहर निकलने से रोका जा सके।
डोईवाला–हरिद्वार हाईवे कॉरिडोर:
यह रूट अपराधियों के लिए सबसे अहम माना जाता है। डोईवाला क्षेत्र से हाईवे, एयरपोर्ट और हरिद्वार की दिशा एक साथ जुड़ती है, जिससे बदमाश आसानी से वाहन बदलकर फरार हो सकते हैं।
प्रेमनगर–सहसपुर–विकासनगर कॉरिडोर:
यह मार्ग जंगल क्षेत्र और कच्चे रास्तों से होकर गुजरता है, जहां कई वैकल्पिक लिंक मौजूद हैं। हाल ही में प्रेमनगर मुठभेड़ के दौरान भी बदमाश इसी दिशा में भागे थे।
राजपुर–मसूरी लिंक कॉरिडोर:
पहाड़ी ढलानों और घने जंगलों वाला यह क्षेत्र संकरे रास्तों से भरा है। यहां अपराधी वाहन छोड़कर पैदल भी फरार हो सकते हैं। ब्रिगेडियर हत्याकांड में भी इसी क्षेत्र में घेराबंदी की गई थी।
बल्लूपुर–बसंत विहार–चकराता रोड कॉरिडोर:
शहर के भीतर स्थित होने के बावजूद यह रूट कई बाहरी इलाकों से जुड़ा है। वाहन चोरी और लूट की घटनाओं में यह मार्ग बार-बार सामने आया है। यहां से बदमाश सहारनपुर या पांवटा साहिब की ओर निकल जाते हैं।
आशारोड़ी–बिहारीगढ़ कॉरिडोर:
सहारनपुर रोड पर स्थित यह मार्ग अपराधियों के लिए राज्य की सीमाओं तक तेजी से पहुंचने का जरिया बनता है। जंगल और हाईवे का संयोजन इसे बेहद संवेदनशील बनाता है, जिससे बदमाश उत्तर प्रदेश, हरियाणा या अन्य राज्यों की ओर फरार हो जाते हैं।
पुलिस का मानना है कि अपराधियों की रणनीति अब तेज भागने और बार-बार रूट बदलने की हो गई है। ऐसे में जवाबी रणनीति भी कॉरिडोर आधारित बनाई गई है, ताकि शुरुआती समय में ही उन्हें घेर लिया जाए।
निष्कर्ष:
देहरादून पुलिस की यह नई रणनीति अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि इन संवेदनशील कॉरिडोर पर सख्ती से निगरानी और त्वरित नाकेबंदी जारी रहती है, तो अपराधियों के लिए शहर से भाग निकलना आसान नहीं होगा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।


