अब ग्रीष्मकाल में दोपहर 1 बजे तक होगी छुट्टी, शिक्षा सचिव ने जारी किया संशोधित शेड्यूल
देहरादून | 5 मई 2026
उत्तराखंड में स्कूलों के समय को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। शिक्षकों के कड़े विरोध के बाद शासन ने ग्रीष्मकालीन समय में संशोधन करते हुए स्कूलों की छुट्टी का समय घटाकर दोपहर 1 बजे कर दिया है। यह नया आदेश राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों पर लागू होगा।
विरोध के बाद लिया गया फैसला
दरअसल, 1 अप्रैल 2026 को जारी नई समयसारिणी में स्कूलों की छुट्टी दोपहर 2:05 बजे निर्धारित की गई थी, जिसका शिक्षकों ने व्यापक विरोध किया। शिक्षकों का कहना था कि बढ़ती गर्मी के बीच यह समय छात्रों और स्टाफ दोनों के लिए असुविधाजनक है। इसके बाद शिक्षा मंत्री को ज्ञापन देकर समय में बदलाव की मांग की गई थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
नया ग्रीष्मकालीन समय लागू
शिक्षा सचिव रविनाथ रमन द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, ग्रीष्मकाल में विद्यालयों की शुरुआत सुबह 7:15 बजे प्रार्थना सभा से होगी और कक्षाएं 7:30 बजे से शुरू होंगी। स्कूलों की छुट्टी अब दोपहर 1 बजे कर दी गई है।
प्रार्थना सभा 15 मिनट की होगी। इसके बाद पहले चार पीरियड 40-40 मिनट के होंगे, जबकि मध्यांतर के बाद पांचवें से आठवें पीरियड 35-35 मिनट के निर्धारित किए गए हैं।
शीतकालीन समय यथावत
शासन ने स्पष्ट किया है कि शीतकालीन समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक स्कूल पहले की तरह सुबह 8:45 बजे शुरू होंगे और दोपहर 3:10 बजे छुट्टी होगी। शीतकाल में पहले चार पीरियड 45-45 मिनट और बाद के चार पीरियड 40-40 मिनट के रहेंगे।
पढ़ाई और मध्यांतर का संतुलन
नई समयसारिणी के तहत ग्रीष्मकाल में कुल साढ़े चार घंटे की पढ़ाई सुनिश्चित की गई है, जबकि प्रार्थना सभा और मध्यांतर के लिए 45 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। शासन का कहना है कि इस बदलाव से पढ़ाई का समय प्रभावित किए बिना छात्रों को गर्मी से राहत मिलेगी।
शैक्षणिक व्यवस्था पर असर
इस फैसले से जहां शिक्षकों और अभिभावकों को राहत मिली है, वहीं छात्रों के लिए भी गर्मी के मौसम में जल्दी छुट्टी एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। स्कूल प्रशासन को भी अब नई समयसारिणी के अनुसार व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड सरकार द्वारा स्कूल टाइमिंग में किया गया यह संशोधन मौसमी परिस्थितियों और शिक्षकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया गया व्यावहारिक निर्णय है। इससे छात्रों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने का संदेश मिलता है। आने वाले समय में इस बदलाव का शैक्षणिक गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


