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चम्पावत कथित दुष्कर्म मामले में एसआईटी जांच से बड़ा खुलासा देवभूमि में साजिश का सनसनीखेज खुलासा

दिनांक: 07 मई 2026
स्थान: चम्पावत/देहरादून, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड के चम्पावत जिले में सामने आए कथित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह मामला एक सुनियोजित साजिश के रूप में सामने आया है। जांच रिपोर्ट के बाद उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग ने पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

शुरुआती जांच में ही जताई गई थी साजिश की आशंका

महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही मामले की सूचना मिली, उन्होंने तत्काल चम्पावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव से फोन पर बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी।

उन्होंने बताया कि पहली ही वार्ता में एसपी रेखा यादव ने कई परिस्थितियों और प्रारंभिक साक्ष्यों के मेल न खाने की बात कही थी। इसी आधार पर मामले में किसी गहरे षड्यंत्र की आशंका व्यक्त की गई थी।

महिला आयोग ने उसी समय निर्देश दिए थे कि जांच पूरी निष्पक्षता और वैज्ञानिक आधार पर की जाए तथा किसी भी प्रकार का दबाव या जल्दबाजी जांच को प्रभावित न करे।

तकनीकी जांच में खुली पूरी साजिश

एसआईटी जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि कथित घटना वास्तव में व्यक्तिगत रंजिश के तहत रची गई साजिश थी।

पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि कमल रावत नामक व्यक्ति ने निजी प्रतिशोध निकालने के उद्देश्य से एक नाबालिग बालिका का इस्तेमाल किया। जांच एजेंसियों के अनुसार बालिका को बहला-फुसलाकर पूरे घटनाक्रम का हिस्सा बनाया गया।

इस खुलासे के बाद प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर भी मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

“नाबालिग की मासूमियत का दुरुपयोग बेहद निंदनीय” — कुसुम कण्डवाल

महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने इस पूरे प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी नाबालिग को झूठे प्रलोभन और साजिश का हिस्सा बनाना अत्यंत शर्मनाक और अमानवीय कृत्य है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं केवल कानून व्यवस्था को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि समाज की नैतिक संरचना और बच्चों के भविष्य पर भी गंभीर असर डालती हैं।

अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि निजी दुश्मनी के लिए कानून का इस्तेमाल हथियार की तरह करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्याय प्रणाली दोनों के लिए खतरनाक है।

आयोग ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

महिला आयोग ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। आयोग का कहना है कि अब जबकि जांच में मामला मनगढ़ंत साबित हो चुका है, ऐसे षड्यंत्रकारियों को कानून के दायरे में लाना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून का दुरुपयोग करने का साहस न कर सके।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के अंतिम कानूनी निस्तारण तक पूरे मामले पर उसकी लगातार निगरानी बनी रहेगी।

देवभूमि के माहौल को बिगाड़ने वालों को नहीं मिलेगी राहत

कुसुम कण्डवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे शांत और सौहार्दपूर्ण राज्य में व्यक्तिगत रंजिश और झूठे मामलों के जरिए सामाजिक वातावरण खराब करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार और महिला आयोग महिला सुरक्षा को लेकर पूरी तरह संवेदनशील हैं, लेकिन इसके साथ ही निर्दोष लोगों की गरिमा और न्याय व्यवस्था की पवित्रता की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है।

निष्कर्ष

चम्पावत का यह मामला केवल एक कथित अपराध की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह भी उजागर किया कि निजी रंजिश और दुर्भावना के चलते कानून का किस तरह दुरुपयोग किया जा सकता है। एसआईटी जांच के बाद सामने आए तथ्यों ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है।

महिला आयोग और पुलिस प्रशासन अब इस मामले को उदाहरण बनाकर भविष्य में ऐसे षड्यंत्रों पर सख्ती से रोक लगाने की तैयारी में हैं। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि महिला सुरक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की झूठी साजिश या निर्दोषों को फंसाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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