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मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर नियुक्ति अब होगी आसान, धामी कैबिनेट ने बदले नियम

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का पुनर्गठन, 277 कर्मचारियों को मिलेगा समान कार्य-समान वेतन

देहरादून | 13 मई 2026

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और प्रोफेसरों की कमी दूर करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों से मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया हुई सरल

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा के आधार पर संकाय सदस्यों की नियुक्ति के लिए अब तक लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाती थी। पहले चयन के बाद फाइल विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजी जाती थी, जिससे नियुक्तियों में काफी देरी होती थी।

कैबिनेट ने अब इस व्यवस्था में संशोधन करते हुए चयन प्रक्रिया को सचिव स्तर पर ही पूरा करने की अनुमति दे दी है। सरकार का मानना है कि इससे मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को तेजी से भरा जा सकेगा और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

स्वास्थ्य मंत्री Subodh Uniyal ने बताया कि पहले वॉक-इन इंटरव्यू के बाद फाइल कई स्तरों से होकर गुजरती थी, लेकिन अब सचिव स्तर पर ही नियुक्ति प्रक्रिया का निस्तारण कर दिया जाएगा।


चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का होगा पुनर्गठन

कैबिनेट बैठक में चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के ढांचे को मजबूत करने का भी निर्णय लिया गया। पहले निदेशालय में कुल 29 पद स्वीकृत थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 40 कर दिया गया है।

नए पदों में वित्त नियंत्रक, कनिष्ठ अभियंता, प्रशासनिक अधिकारी, लेखाकार, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक, मल्टी परपज वर्कर और वाहन चालक सहित कई महत्वपूर्ण पद शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सकेगी।


277 कर्मचारियों को समान वेतन का लाभ

कैबिनेट ने Government Medical College Srinagar में वर्षों से कार्यरत 277 कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। संविदा, दैनिक वेतन, नियत वेतन और प्रबंधन समिति के माध्यम से कार्य कर रहे इन कर्मचारियों को अब “समान कार्य-समान वेतन” का लाभ मिलेगा।

ये कर्मचारी वर्ष 2009 से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से वे वेतन असमानता को लेकर मांग उठा रहे थे। सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


लैब तकनीशियन संवर्ग का भी पुनर्गठन

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्ताव पर आईपीएचएस मानकों के अनुरूप लैब तकनीशियन संवर्ग के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी गई है।

इसके तहत मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के 266, टेक्निकल ऑफिसर के 54 और चीफ टेक्निकल ऑफिसर के 25 पदों सहित कुल 345 पदों का पुनर्गठन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में जांच सेवाएं अधिक प्रभावी और आधुनिक बन सकेंगी।


स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

धामी सरकार के इन फैसलों को राज्य की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों की कमी दूर होने से छात्रों को बेहतर शिक्षा मिलेगी, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कर्मचारियों को समान वेतन देने जैसे फैसले भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

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