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उत्तराखंड में दिखा ‘नो व्हीकल डे’ का असर: कोई 16 किमी पैदल चला, कोई साइकिल-ऑटो से पहुंचा दफ्तर, सीएम का काफिला भी हुआ छोटा

देहरादून, 16 मई 2026

प्रधानमंत्री Narendra Modi की पेट्रोल-डीजल बचाने और ऊर्जा संरक्षण की अपील का असर अब उत्तराखंड में साफ दिखाई देने लगा है। राज्य सरकार से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक ने इस पहल को गंभीरता से अपनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को देहरादून सहित कई जिलों में ‘नो व्हीकल डे’ मनाया गया, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों ने निजी वाहनों के बजाय पैदल, साइकिल, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेकर लोगों को सकारात्मक संदेश दिया।


छोटा हुआ मुख्यमंत्री का काफिला

शनिवार को सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के काफिले को लेकर रही। आमतौर पर लंबा वीवीआईपी काफिला नजर आने वाला दृश्य इस बार बदला हुआ दिखाई दिया। मुख्यमंत्री का काफिला बेहद सीमित रहा और उसमें केवल दो वाहन ही नजर आए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद राज्य सरकार ने ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी जागरूक पहलें भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बनती हैं और जब सरकार स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करती है तो जनता भी उससे प्रेरित होती है।


सूचना विभाग ने शुरू की नई पहल

देहरादून स्थित सूचना विभाग में भी ‘नो व्हीकल डे’ का व्यापक असर देखने को मिला। विभाग ने सप्ताह में एक दिन निजी पेट्रोल-डीजल वाहनों का उपयोग नहीं करने का फैसला लिया है। शनिवार को अधिकारी और कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन और साइकिल से कार्यालय पहुंचे।

सूचना विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी स्वयं साइकिल से दफ्तर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती ईंधन खपत को देखते हुए ऊर्जा संरक्षण आज समय की बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि सीमित ईंधन संसाधनों के बीच हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह बचत की इस मुहिम में अपनी भागीदारी निभाए।


16 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे अधिकारी

इस अभियान के दौरान सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक केएस चौहान ने सबसे अलग उदाहरण पेश किया। वे अपने विजय पार्क स्थित आवास से करीब 16 किलोमीटर पैदल चलकर कार्यालय पहुंचे।

उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वयं इस दिशा में अपील कर रहे हैं तो अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल प्रतीकात्मक पहल नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार में भी अपनाया जाना चाहिए।

शनिवार को कई अधिकारी ऑटो और साझा परिवहन से कार्यालय पहुंचे, जबकि कुछ कर्मचारी साइकिल का उपयोग करते नजर आए।


जिलों में भी दिखा असर

राज्य के अन्य जिलों में भी इस पहल का असर दिखाई दिया। हरिद्वार के जिलाधिकारी Mayur Dixit लगातार पैदल कार्यालय जाते नजर आए। हाथों में फाइल लेकर सड़क पर चलते जिलाधिकारी को देखकर आम लोग भी हैरान रह गए। उनके साथ कई कर्मचारी भी पैदल दफ्तर पहुंचे।

वहीं नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Manjunath TC बाइक से निरीक्षण और कार्यालय कार्य करते दिखाई दिए। उन्होंने थानों के निरीक्षण और फील्ड विजिट के दौरान सामान्य तरीके से यात्रा कर ईंधन बचत का संदेश दिया।

इससे पहले कैबिनेट मंत्री Ganesh Joshi भी स्कूटी से कैबिनेट बैठक में पहुंचे थे, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही थीं।


पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता पर जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सप्ताह में एक दिन भी निजी वाहनों का उपयोग कम किया जाए तो पेट्रोल-डीजल की बड़ी मात्रा में बचत संभव है। साथ ही इससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी लाई जा सकती है।

उत्तराखंड में शुरू हुई यह पहल अब केवल सरकारी औपचारिकता नहीं रह गई है, बल्कि धीरे-धीरे जन जागरूकता अभियान का रूप लेती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री से लेकर छोटे कर्मचारियों तक के प्रयासों से आम लोगों में भी सकारात्मक संदेश जा रहा है।


निष्कर्ष

ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड में शुरू हुआ ‘नो व्हीकल डे’ अभियान अब जनभागीदारी की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री के छोटे काफिले से लेकर अधिकारियों के पैदल और साइकिल से कार्यालय पहुंचने तक, यह पहल लोगों को ईंधन बचत और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दे रही है। यदि इस तरह की पहल लगातार जारी रही तो भविष्य में यह पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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