BREAKING

उत्तराखंड में नकली दवाओं पर बड़ा विवाद, एसटीएफ की कार्रवाई पर औषधि विभाग ने उठाए सवाल

देहरादून/हरिद्वार/कोटद्वार | 24 मई 2026

उत्तराखंड में नकली दवाओं के कथित कारोबार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ऑनलाइन फर्जी दवाओं के नेटवर्क का खुलासा करने वाली एसटीएफ और औषधि प्रशासन विभाग अब आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। एसटीएफ जिन फैक्टरियों पर नकली दवा निर्माण का आरोप लगाकर कार्रवाई कर रही है, औषधि प्रशासन उन्हीं इकाइयों के बचाव में उतर आया है।

मामले ने अब प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। एक ओर एसटीएफ कार्रवाई को बड़ी सफलता बता रही है, वहीं दूसरी ओर औषधि प्रशासन का दावा है कि जांच में संबंधित फैक्टरियों में कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली।


ऑनलाइन नकली दवाओं के नेटवर्क का हुआ था खुलासा

दरअसल, एक दिन पहले उत्तराखंड एसटीएफ ने नकली दवाओं के ऑनलाइन कारोबार का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में गौरव त्यागी शामिल है, जिसने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

एसटीएफ के अनुसार गौरव त्यागी ने बताया कि वह अपने भाई मयंक उर्फ मोंटी के साथ मिलकर हरिद्वार जिले के भगवानपुर स्थित एक फैक्टरी में विभिन्न ब्रांडों की नकली दवाएं तैयार करवाता था।


फेसबुक पेज बनाकर चलाया जा रहा था कारोबार

जांच में सामने आया कि आरोपी फेसबुक पर “एसके हेल्थकेयर” नाम से पेज बनाकर ब्रांडेड दवाओं को बेहद कम कीमतों पर बेचते थे। सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर नकली दवाओं का नेटवर्क तैयार किया गया था।

एसटीएफ को पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर संबंधित फैक्टरी में छापेमारी की गई। टीम ने वहां मौजूद सामग्री और दस्तावेजों की जांच भी की।


औषधि प्रशासन ने कहा- फैक्टरी में कुछ गलत नहीं मिला

मामले में नया मोड़ तब आया जब सहायक औषधि नियंत्रक डॉ. सुधीर कुमार ने एसटीएफ की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि एसटीएफ के साथ दोनों जगह ड्रग इंस्पेक्टर भी मौजूद थे और प्रारंभिक जांच में कोई अवैध गतिविधि सामने नहीं आई।

डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, कोटद्वार स्थित फैक्टरी में केवल रॉ मैटेरियल रखा हुआ था, जिसका सैंपल शक के आधार पर लिया गया है। वहीं भगवानपुर स्थित फैक्टरी पूरी तरह वैध है और वर्ष 2023 से लाइसेंस के तहत दवा निर्माण कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि विभागीय जांच में दोनों स्थानों पर किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।


एसटीएफ ने कार्रवाई को बताया नियमसम्मत

वहीं एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने साफ कहा कि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई है। उन्होंने बताया कि किसी भी सर्चिंग और सैंपलिंग के लिए औषधि निरीक्षक कानूनी रूप से अधिकृत होते हैं और कार्रवाई से पहले विभाग को विधिवत सूचना दी गई थी।

अजय सिंह ने कहा कि कोटद्वार सिडकुल क्षेत्र में स्थित फैक्टरी से भारी मात्रा में दवा निर्माण सामग्री बरामद की गई है और नियमानुसार इकाई को सील भी किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भगवानपुर स्थित फैक्टरी पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। साथ ही इस मामले में प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई है।


दो विभागों के बीच टकराव से बढ़ी चर्चा

उत्तराखंड में यह पहला मौका नहीं है जब दो सरकारी विभाग आमने-सामने आए हों। इससे पहले आबकारी विभाग और जिला प्रशासन के बीच शराब के ठेकों को लेकर भी टकराव सामने आ चुका है।

अब नकली दवाओं के मामले में एसटीएफ और औषधि प्रशासन के अलग-अलग दावों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों के बीच भी यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सच्चाई क्या है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।


जांच के घेरे में सोशल मीडिया नेटवर्क

एसटीएफ अब सोशल मीडिया के जरिए चल रहे पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि कम कीमतों पर ब्रांडेड दवाएं बेचने के नाम पर लोगों को लंबे समय से ठगा जा रहा था।

जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के जरिए कितने लोगों तक दवाएं पहुंचाई गईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।


निष्कर्ष

उत्तराखंड में नकली दवाओं के कथित कारोबार को लेकर शुरू हुई कार्रवाई अब प्रशासनिक विवाद का रूप लेती दिखाई दे रही है। एक ओर एसटीएफ इसे बड़े रैकेट का खुलासा बता रही है, तो दूसरी ओर औषधि प्रशासन संबंधित फैक्टरियों को वैध बता रहा है। ऐसे में अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और वैज्ञानिक रिपोर्ट पर सभी की नजर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े खुलासे कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *