देहरादून, उत्तराखंड | 27 मई 2026
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी ने अब समाज के प्रबुद्ध और प्रभावशाली वर्ग तक पहुंच बनाने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड प्रवास के दौरान आयोजित होने वाला ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ पार्टी की इसी नई राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह आयोजन केवल एक औपचारिक संवाद कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके जरिए भाजपा उस वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है, जो समाज में राय बनाने और जनमत को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाता है।
भाजपा का मानना है कि आज के दौर में राजनीति केवल चुनावी सभाओं और रैलियों तक सीमित नहीं रह गई है। अब राजनीतिक माहौल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मोबाइल स्क्रीन, यूट्यूब चैनलों, इंटरनेट मीडिया पोस्ट और व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए भी तैयार होता है। ऐसे में प्रबुद्ध और प्रभावशाली वर्ग की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
इसी बदलते राजनीतिक माहौल को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ को अपनी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया है। पार्टी इस मंच के जरिए डॉक्टरों, प्रोफेसरों, शिक्षकों, वकीलों, पत्रकारों, व्यापारियों, रिटायर्ड अधिकारियों और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह वर्ग भले ही संख्या के लिहाज से बहुत बड़ा न हो, लेकिन समाज में इसकी स्वीकार्यता और प्रभाव काफी व्यापक होता है। यही कारण है कि भाजपा अब इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
भाजपा इस सम्मेलन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह केवल वैचारिक मुद्दों पर राजनीति करने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि नीति, विकास, राष्ट्रवाद और सुशासन जैसे विषयों पर गंभीर संवाद करने वाला राजनीतिक संगठन भी है।
पार्टी इस आयोजन के माध्यम से कई स्तरों पर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है। पहला, भाजपा यह दिखाना चाहती है कि शिक्षित और प्रभावशाली वर्ग के बीच उसकी स्वीकार्यता अभी भी मजबूत बनी हुई है। दूसरा, पार्टी यह संकेत देना चाहती है कि उसके पास मजबूत वैचारिक और राजनीतिक तंत्र मौजूद है।
इसके साथ ही भाजपा विपक्ष को यह संदेश भी देना चाहती है कि फिलहाल विपक्ष उस स्तर पर संगठित नहीं है कि वह इस प्रभावशाली वर्ग को पूरी तरह अपने पक्ष में कर सके।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो चुनाव केवल मतदान वाले दिन नहीं जीते जाते, बल्कि उससे पहले समाज में बनने वाले माहौल से उनकी दिशा तय होती है। भाजपा फिलहाल इसी माहौल को अपने पक्ष में बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ को भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां पार्टी सीधे वोटरों से ज्यादा समाज के उन वर्गों को साधने में जुटी है, जो आम लोगों की सोच और राजनीतिक धारणा को प्रभावित करते हैं।
भाजपा के इस कार्यक्रम को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य राजनीतिक दल भी बुद्धिजीवी वर्ग को जोड़ने के लिए इसी तरह के कार्यक्रमों पर जोर दे सकते हैं।
उत्तराखंड में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों की रणनीति और जनसंपर्क अभियान भी और आक्रामक होते दिखाई देंगे।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में भाजपा का ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक दौर में जनमत और माहौल को प्रभावित करने की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी बुद्धिजीवी और प्रभावशाली वर्ग के जरिए चुनावी वातावरण को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश कर रही है। आगामी चुनावों को देखते हुए यह सम्मेलन प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


