ऋषिकेश, उत्तराखंड | 27 मई 2026
राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर जंगली हाथियों का एक बड़ा दल ऋषिकेश के खदरी खड़क माफ गांव के गंगा तटीय क्षेत्र में पहुंच गया है। हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों से क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है। खासकर खादर क्षेत्र के किसान धान की बुआई के मौसम में हाथियों के हमलों और फसल नुकसान को लेकर बेहद चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में पहले से ही एक दंतैल जंगली हाथी घूम रहा था, जिससे किसान परेशान थे। अब हाथियों के बड़े झुंड की आमद ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। किसानों को डर है कि यदि हाथियों का झुंड खेतों की ओर बढ़ा तो धान की नई पौध पूरी तरह नष्ट हो सकती है।
खदरी खड़क माफ गांव का खादर क्षेत्र अपनी उपजाऊ भूमि के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहा है। गंगा किनारे बसे इस इलाके में बड़ी संख्या में किसान खेती और बागवानी पर निर्भर हैं। लेकिन हाल के वर्षों में वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही और फसलों पर हमलों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
स्थानीय किसान भगवान सिंह नेगी ने बताया कि उनके एक एकड़ क्षेत्र में आम का बगीचा है, जिसे जंगली हाथी लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल कई पेड़ टूट जाते हैं और बगीचे की संख्या घटती जा रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
किसानों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बागवानी से जुड़े नुकसान को मुआवजे की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में आम बागों और अन्य बागवानी फसलों को नुकसान होने के बावजूद किसानों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिलती।
ग्रामीणों का कहना है कि खेती और बागवानी में लगातार हो रहे नुकसान के कारण अब किसान धीरे-धीरे कृषि कार्य से दूरी बनाने लगे हैं। इसका असर गांव की अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कृषि व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त पर्यावरण कार्यकर्ता और कृषि विशेषज्ञ डॉ. विनोद प्रसाद जुगलान ने कहा कि हिमालय से निकलने के बाद गंगा का पहला खादर क्षेत्र खदरी वर्षों से अपनी उपजाऊ भूमि के लिए पहचाना जाता रहा है। लेकिन अब यहां किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि एक ओर सौंग नदी की बाढ़ और भू-कटाव खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जंगली हाथियों और अन्य वन्यजीवों के हमलों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। लगातार नुकसान के कारण किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
ग्रामीणों और विशेषज्ञों का कहना है कि खेती से विमुख हो रहे किसानों की जमीनों का फायदा अब भूमाफिया उठा रहे हैं। इलाके में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि गांव के करीब एक तिहाई किसानों ने खेती छोड़ दी है, जिसके बाद कृषि भूमि को रिहायशी प्लॉट में बदला जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में खदरी गांव का भूगोल और इतिहास पूरी तरह बदल सकता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान के पीछे गांव की सीमा से लगे लगभग 15 हेक्टेयर प्लांटेशन क्षेत्र के पास हाथी खाई का निर्माण कराया जाए, ताकि वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्र और खेतों में प्रवेश न कर सकें।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में फसल नुकसान के साथ-साथ मानव जीवन पर भी खतरा बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
ऋषिकेश के खदरी खड़क माफ क्षेत्र में जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही किसानों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। खेती और बागवानी पर निर्भर ग्रामीण लगातार नुकसान झेल रहे हैं, जबकि मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी असंतोष बढ़ रहा है। यदि प्रशासन और वन विभाग ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र में कृषि व्यवस्था और ग्रामीण जीवन दोनों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।


