दिनांक: 22 सितंबर 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
उत्तराखंड सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम यानी RTI के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि केवल इस आधार पर सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि संबंधित विषय से जुड़ा कोई मामला अदालत में विचाराधीन है। किसी न्यायिक मामले का लंबित होना अपने आप में RTI के तहत सूचना रोकने का आधार नहीं बनता।
राज्य सूचना आयोग के इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि लोक सूचना अधिकारी को सूचना देने से इनकार करने के लिए RTI अधिनियम में निर्धारित आधारों का ही पालन करना होगा। महज अदालत में मामला लंबित होने का हवाला देकर आवेदक को जानकारी से वंचित नहीं किया जा सकता।
पुलिस भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की मांगी गई थी जानकारी
मामला पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। एक अपीलकर्ता ने भर्ती के दौरान एक महिला अभ्यर्थी की ओर से प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों से संबंधित जानकारी RTI के माध्यम से मांगी थी।
लोक सूचना अधिकारी ने जानकारी देने से इनकार करते हुए तर्क दिया कि संबंधित दस्तावेज तीसरे पक्ष से जुड़े हैं और तीसरे पक्ष की सहमति के बिना इन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।
इसके अलावा सूचना अधिकारी की ओर से यह भी कहा गया कि दस्तावेज से संबंधित मामला जोधपुर की अदालत में विचाराधीन है। इसी आधार पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गई।
सूचना आयोग के सामने पहुंचा मामला
सूचना नहीं मिलने के बाद अपीलकर्ता ने मामले को राज्य सूचना आयोग के समक्ष रखा। सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद कोठियाल ने मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार किया।
सुनवाई में सामने आया कि अपीलकर्ता ने जोधपुर विश्वविद्यालय के नाम पर प्रस्तुत किए गए दस्तावेज को फर्जी होने का दावा किया है। इस दस्तावेज की प्रामाणिकता को लेकर मामला जोधपुर अदालत में विचाराधीन बताया गया।
आयोग ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा कि दस्तावेज की वास्तविकता और प्रामाणिकता की जांच संबंधित सक्षम पुलिस अधिकारी के स्तर पर कराई जा सकती है।
न्यायालय में लंबित मामला सूचना रोकने का आधार नहीं
राज्य सूचना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि किसी दस्तावेज या सूचना से संबंधित मामला अदालत में लंबित होने मात्र से RTI के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
आयोग के अनुसार यदि सूचना पर रोक लगाने का कोई वैधानिक आधार मौजूद नहीं है तो केवल न्यायालय में मामला विचाराधीन होने का हवाला देकर जानकारी रोकी नहीं जा सकती।
आयोग ने यह भी कहा कि दस्तावेज की प्रामाणिकता को लेकर यदि कोई संदेह है तो उसे संबंधित उच्च पुलिस अधिकारी के पास भेजकर उसकी जांच कराई जानी चाहिए।
लोक सूचना अधिकारी को जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश
सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को संबंधित जानकारी अपीलकर्ता को उपलब्ध कराने का आदेश दिया। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद दस्तावेज उपलब्ध कराने से सिर्फ इसी आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता।
साथ ही दस्तावेज की प्रामाणिकता से जुड़े पहलू की जांच के लिए उसे संबंधित उच्च पुलिस अधिकारी को भेजने की बात कही गई है।
RTI मामलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही व्यवस्था
सूचना आयोग का यह आदेश उन मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां लोक सूचना अधिकारी न्यायालय में मामला विचाराधीन होने का हवाला देकर RTI के तहत जानकारी देने से इनकार करते हैं।
आयोग ने अपने आदेश के जरिए यह स्पष्ट किया है कि सूचना रोकने के लिए RTI अधिनियम में निर्धारित कानूनी आधार देखना आवश्यक है। केवल किसी मामले के न्यायालय में लंबित होने से सूचना स्वत: प्रतिबंधित नहीं हो जाती।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सूचना आयोग ने RTI के तहत सूचना देने को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अदालत में मामला विचाराधीन होना अपने आप में सूचना रोकने का आधार नहीं है। पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती से जुड़े दस्तावेजों के मामले में आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को संबंधित जानकारी अपीलकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही दस्तावेज की प्रामाणिकता की जांच के लिए उसे संबंधित उच्च पुलिस अधिकारी को भेजने को कहा गया है।


